Book Title: Niryavalikasutram
Author(s): Chandrasuri, 
Publisher: Agamoday Samiti

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Page 30
________________ निरया - सोंडाए गिण्हति २ अप्पेगइयाओ पुट्ठे ठवेति अप्पेगइयाओ खंधे ठवेति, एवं अप्पे० कुंभे ठवेति, अप्पे० सीसे ॥१४॥ उवेति, अप्पे० दंतमुसले वेति, अप्पे० सोंडाए गहाय उट्टं वेहासं उद्दिह, अप्पे० सोंडागयाओ अंदोलावेति, अप्पेगइया दंतंतरेसु नीति, अप्पे० सीभरेणं प्हाणेति अप्पेगइयाओ अणेगेहिं कीलावणेहि कीलावेति । तते चंपाए नयरीए सिंघाडगतिगच उक्कचच्चरमहापहपहेसु बहुजणो अमनस्स एवमाइक्खइ जाव परूवेति - एवं खलु देवाणुपिया ! वेहल्ले कुमारे सेयणएणं गंधहत्थिणा अंतेउरं तं चैव जाव णेगेहिं कीलावणएहिं कीलावेति, तं एस णं वेहल्ले कुमारे रज्जसिरिफलं पञ्चणुब्भवमाणे विहरति, नो कूणिए राया । तते णं तीसे पउमावईए देवीए इमीसे कहाए लद्धट्टाए समाणीते अयमेयाख्वे जात्र समुप्पज्जित्था, एवं खलु वेहल्ले कुमारे सेयणएणं गंधहत्थिणा जाव अणेगेहिं कीलावणएहिं कीलावेति, तं एस णं वेहल्ले कुमारे रज्जसिरिफलं पच्चणुब्भवमाणे विहरति, नो कोणिए राया, तं किं अम्ह रज्जेण वा जाव जणवएण वा जइ णं अम्हं सेयणगे गंधहत्थी नत्थि ? तं सेयं खलु ममं कूणियं रायं एयमहं विन्नवित्तए ति कटु एवं संपेहेति २ जेणेव कूणिए राया तेणेव उवा० २ करतल जाव एवं क्यासि एवं खलु सामी वेहल्ले कुमारे सेयण गंधहत्या जाव अणेगेहिं कीलावणाहिं कीलावेति, तं किन्हें सामी अम्हं रज्जेण वा जाव जणवरण वा जति णं अम्हं here गंधहत्थी नfor ? तए णं से कूणिए राया पउमावईए देवीए एयमहं नो आढाति नो परिजाणति तुसिणीए संचिइति । तते सा मावई देवी अभिक्खणं २ कूणियं रायं एयम विन्नवेइ । तते णं से कूणिए राया पउमावईए देवीए अभिक्खणं २ एम विन्नविजमाणे अन्नया कयाइ वेहल्लं कुमारं सद्दावेति २ सेयणगं गंधहत्थि अट्ठारसर्वकं च हारं *469)** 169) *0*16) *** 169) Jain Educa For Personal & Private Use Only वलिका• ॥१४॥ ainelibrary.org

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