Book Title: Mandir Vidhi
Author(s): Basant Bramhachari
Publisher: Akhil Bharatiya Taran Taran Jain Samaj

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Page 17
________________ १७ धरयति धम्मु जु जिन कहिउ, धरयति लोउ अलोउ । अर्थति अर्थह समय समु, भय षिपिय अमिय सुइ उत्तु ॥ १० ॥ धरयति धरियो ममल पउ, समल भाव विलयन्तु । जामन मरन जु समल पउ, अन्मोय न्यान विलयन्तु ॥ ११ ॥ धरनु विलय जिनु धरन धरिउ, धम्मु तिलोय पसिद्ध । नन्त न्यान विन्यान पउ, पर पर्जय विलयन्तु ॥ १२ ॥ गहनु विलय अगहनु गहउ, भय सल्य संक विलयंतु । अमिय पयोहर रमन पउ, अभय अमिय विलसंतु ॥ १३ ॥ सहनु विलय जिन सहनु सहिउ, सहिय न्यान उवएसु । धरनु धरिउ जिन धरनु जिन, पर्जय भय नंत विलंतु ॥ १४ ॥ रहनु विलय जिन रहनु रहिउ, रहि पर्जय विलयंतु | दिप्ति दिस्टि सुइ न्यान पउ, विन्यान मुक्ति दर्संतु ॥ १५ ॥ रमनु विलय जिन रमनु रमिउ, रमियो उवनु हिययार । सहयार रमनु साहिउ ममलु, अमिय रस रमन हिययार || १६ ॥ दंसु गलिय जिन दर्स धरिउ, दिस्टि गलिय जिन दिस्टि । तारन तरन सहाउ लई, धम्मु इस्टि परमिस्टि ॥ १७ ॥ लषु गलिय जिन लषु लषिउ, जिनयति कम्म सहाउ । भय विनासु भवु जु मुनहु, अमिय ममल सुभाउ ॥ १८ ॥ अलषु गलिय जिन अलषु लषिउ, लतउ ममल सहाउ । भय षिपनिकु पर्जय विलयं, विषु विलय अमिय रस भाउ || १९ ॥ गंमु गलिय जिन गमु गमिऊ, गम दिप्ति दिस्टि उव उत्तु । सब्द इस्टि सुइ अमिय मउ, भय षिपिय ममल दर्संतु ॥ २० ॥ अगमु गलिय जिनु अगमु गमिउ, गमियो नन्तानन्तु । विंद विन्यान सु समय मउ, धम्मु रमनु सिव पंथु ॥ २१ ॥ लब्धि गलिय जिन लब्धि पउ, जिनियो कम्मु सहाउ । पर्जय भय विलयंतु सुइ, अमिय रस ममल सुभाउ ॥ २२ ॥ परम परम परिनामु धरि, परम न्यान सहकार । पर पर्जय भय सल्य विली, परम धर्म सहकार ॥ २३ ॥ ४. कलशों की गाथा (फूलना क्र.७९) (विषय : परिणाम भेद चार) चौ उववन्न सुभावं, दिगंतरं नन्त नन्ताइ जिन दिट्ठं । पय कमले सहकारं, क्रांति सहकार कलस जिन ढलियं ॥ १ ॥

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