Book Title: Kalpsutram
Author(s): Bhadrabahuswami, Suryodaysuri, Dharmsagar
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

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Page 372
________________ श्रीकल्प ॥ ३४८ ॥ Jain Educat भगवओ तित्थगरस्स उवरिल्लं दाहिणं सकहं गेण्हति ईसाणे देविंदे देवराया उवरिल्लं वामं सक गेण्डति, चमरे असुरिंदे असुरराया हेद्विल्लं दाहिणं सकई गेण्हति, बली वइरोअणिंदे वइरोअणराया हेट्ठिल्लं वामं सकहं गेण्हति । अवसेसा भवणवइ जा माणिया देवा जहारिहं अवसेसाई अंगुवंगाई केइ जिणभत्तीए, केइ जीअमेअं, तिकट्टु, केइ धम्मो तिकट्टु गेति । तसे सक्के देविंदे देवराया बहवे भवणवइ जाव वेमाणिए देवे जहारिहं एवं वयासी - खिप्पामेव भो देवाणुप्पि ! सव्वरयणामए महति महालये तओ चेइअशुभ करेह । एवं भगवओ तित्थगरस्स चिइगाए, एगं गणहरचिड़गाए, एगं अवसे साणं गाणं चिगाए । तरणं ते बहवे जाव करेंति । तए णं ते बहवे भवणवइ जाव वेमाणिया देवा तित्थगरस्स परिणिव्वाणमहिमं करिति, करेत्ता जेणेव नंदीसरवरदीवे तेणेव उवागच्छति । तए णं से सक्के देविंदे देवराया पुरथिमिल्ले अंजणगपव्व ए अहि महामहिम करेंति । तए णं सकस्स देविंदस्स देवरन्नो चचारि लोगपाला चउसु दहिमुहपन्नए अद्वाहि महामहिमं करेंति । तणं ईसा उत्तरिल्ले अंजणगे अट्ठाहिअं, तस्स लोगपाला चउसु दहिमुहपव्वएस अट्ठाहिअं, चमरो अ दाहिणिल्ले तस्स लोगपाला (चउसु) दहिमुहपव्वसु, बली पञ्चत्थिमिल्ले, लोगपाला चउसु दहिमुहपव्वसु । तए णं ते बहवे भवणवइ अट्ठाहियाओ महामहिमाओ करेंति, करेत्ता जेणेव साईं साई विमाणाई, जेणेव साई साईं भवणाई, जेणेव साओ साओ सभाओ सुहम्माओ, जेणेव स-माणवगा चेइयखंभा तेणेव उवागच्छंति, उवागच्छित्ता वयरामएस गोलसमुग्गएसु freeकहाओ पक्खिति । पक्खिवित्ता अग्गेहिं वरेहिं गंधेहिं अ मल्लेहि अ अच्चैति ॥ २२७॥ (जंबु० प० पेज १३० ) [ 'उसभस्स णं ३' इत्यादित: 'काले गच्छइ' त्ति पर्यन्तं प्राग्वत् ] national For Private & Personal Use Only किरणाव | टीका व्या० ॥३४८| elbrary.org

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