Book Title: Jainagam Stoak Sangraha
Author(s): Maganlal Maharaj
Publisher: Jain Divakar Divya Jyoti Karyalay Byavar

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Page 14
________________ ( १२ ) mr m mrar mr mmm ३४८ ३४६ ३५० لل ३५४ ३६८ ३७३ ३७८ س अध्याय २२ ६८ वोल का अल्प बहुत्व २३ पुद्गल परावर्त २४ जीवो की मार्गणा के ५६३ वोल २५ चार कषाय २६ श्वासोश्वास २७ अस्वाध्याय २८ ३२ सूत्रो के नाम २६ अपर्याप्ता पर्याप्ता द्वार ३० गर्भ विचार ३१ नक्षत्र और विदेशगमन ३२ पाच देव ३३ आराधक विराधक ३४ तीन जाग्रिका ३५ छ काय के भव ३६ अवधिपद ३७ धर्म ध्यान ३८ छ. लेश्या ३९ योनि पद ४० आठ आत्मा का विचार ४१ व्यवहार समकित के ६७ बोल ४२ काय स्थिति ४३ योगो का अल्पवहुत्व ४४ बल का अल्प बहुत्व ४५ समकित का ११ द्वार ४६ खण्डा जोयणा ४७ धर्म सम्मुख होने के १५ कारण ३७६ ३८३ ३८४ m ३८७ ३६५ ४०० ४०१ ४०५ ४.६ ४४०

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