Book Title: Jambu Gun Ratnamala
Author(s): Jethmal Choradia
Publisher: Jain Dharmik Gyan Varddhani Sabha

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Page 22
________________ जंबु गुण रन माला पृ. १६ सुत ॥ स्वार्थी या सब कोई कनक कामिनी तकीयो नी परे मूल्यो । छूट कहुवां फूल्यो । पूरब दुख सब भुल्योरे । २० ॥ ११ ॥ दीर्घायु पुन्य जोगे । मिल्यो शरीर नोरोगे । साथ साघवी यांरी जोगेरे । २० ।। १२ ।। पायो जे दुर्लभ पावो । अजु धर्म पंथ नहीं आवो । तो पडली घणो पछतावारे । रे० ॥ १३ चपलानो चमकारो । चल दल चपल श्रदा । ज्युं मान बनो अवतारोरे रं० ॥ १४ ॥ डाभ अणी जळ बिंदु | चलत लहर ज्युं सिंधु ॥ चल्या जात मुसल हिंदु रे । रं० ॥ १५ ॥ मात पिता नारी । करता प्रीति अपारी । पिण मुतलव करी यारीरे ॥ २० ॥ १६ घेवर चोर कँदोई । ए हेतु तन्यो जोईरे । २० ॥ १७ ॥ मोह मदिरा में छकीयां । गुरु संग नहीं कर सकीयो से || २० ॥ १८ ॥ जन्म जरा अरु मरणो । भवि जन इन से डरणो । ले ल्यो श्री जिन सरणो रे | र् ं० ।। १९ ॥ करो व्रत शक्ति सारू । कर्म रोगरी दारू । अब जोग मिल्या छै वारू रे ॥ ६० ॥ २० ।। इम विविध भांति समझाया । उत्तम जन मन भाया । मानु सुधा मेघ वरसायारे रं० ॥ २१ ॥ साधु श्रावक धर्म दोई। शिवपुर मार्ग होई । ज्यों ग्रह पापे सोहोरे ॥ रं० ॥ २२ ॥ दान शील तप भावो । अघ अकतूल उडावो | ज्युं अमरा पद पावोरे । रं० || २३ || सभा जन पन आणंदा । धन २ धर्म दिणंदा इस गुण बोले गुरां इंदारार ॥ ० ॥ २४ ॥ केइ लेबे चरता । केई द्वादश बरता । केई समकित सनुसरतारे । २० ।। २५ ।। इम लाभ उपार्जी भारी करी नमस्कार वंदणारे । गया निजघर नर नारीरे ॥। २० ।। २६ ।। ढाल सप्तमी भाषी ऋषिराज देशना दाखी । हुन कुंवर चरित्र अभिलाषीरे । रं० ॥ २७ ॥ दास्त 6

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