Book Title: Agam Guna Manjusha
Author(s): Gunsagarsuri
Publisher: Jina Goyam Guna Sarvoday Trust Mumbai

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Page 1728
________________ 6955555555555555555 (४१) पिडनिजुत्ति [३३] $$$$ $$$$2208 CCF听听听听听听听听听听听听听听听听明明明明明明明明明乐乐国乐乐乐乐乐乐乐乐历历乐乐乐乐玩乐乐 वोच्छेओ संजमतवाणं ॥१८५||-१८५२०८) जो जहवायं न कुणई मिच्छद्दिट्ठी तओ हु को अन्नो वड्ढेइ य मिच्छत्तं परस्स संकं जणेमाणो ॥१८६।।-१८६२०९) वड्ढेइ तप्पसंगं गेही य परस्स संकं जणेमाणो॥१८६।।-१८६ सजियपि भिन्नदाढो न मुयइ निद्धंधसो पच्छा ।।१८७।।-१८७२१०) खद्धे निद्धे य रुया सुत्ते हाणी तिगिच्छणे काया पडियरगाणवि हाणी कुणइ किलेसं किलिस्संतो॥१८८१-१८८२११) जह कम्मं तु अकप्पं तच्छिक्कं वाऽवि भायणठियं वा परिहरणं तस्सेव य गहियमदोसं च तह भणइ ॥१८९||-१८९ २१२) अब्भोज्जे गमणाइ य पुच्छा दव्वकुलदेस खित्त भावे य एव जयंते छलणा दिढता तत्थिमे दोन्नि ॥१९०।-१९० २१३) जह वंतं तु अभोज भत्तं जइविय सुसक्कयं आसि एवमसंजमवमणे अणेसणिज्ज अभोज्जं तु ॥१९१||-१९१२१४) मज्जारखइयमंसा मंसासित्थि कुणिमं सुणयवंतं वन्नाइ अन्नमुप्पाइयंति किं तं भवे भोज्ज ।।१९२||-१९२२१५) केई भणंति पहिए अट्ठाणे मंसपेसिवोसिरणं संभारिय परिवेस वट्ट न वारेइ सुओ करे धेत्तुं ॥१९३||-१९३२१६) अविकालकरहीखीरं ल्हसुण पलंडू सुरा य गोमंसं वेयसमएवि अभयं किंचि अभोज्जं अपेज्जं च ॥१९४॥-१९४२१७) बन्नाइजुयावि बली सपललफलसेहरा असुइनत्था असुइस्सविप्पुसेणविजहछिक्काओ अभोज्जाहुँतिभिक्खाओ ।।१९५||-१९५२१८) एमेव उज्झियंमिवि आहाकम्ममि अकयए कप्पे होइ अभोज भाणे जत्थ व सुद्धपि तं पडियं ।।१९६||-१९६ २१९) वंतुच्चारसरिच्छ कम्मं सोउमवि कोविओ भीओ परिहरइ सावि य दुहा विहिअविहीए य परिहरणा ॥१९७१-१९७ २२०) सालीओअणहत्थं द8 भणइ अविकोविओ देति कत्तोच्चउत्ति साली वणि जाणइ पुच्छ तं गंतुं ॥१९८||- १९८ २२१) गंतूण आवणं सो वाणियगं पुच्छए कओ साली पच्चंते मगहाए गोब्बरगामो तहिं वयइ ।।१९९||-१९९ २२२) कम्मासंकाएँ पहं मोत्तुं कंटाहिसावया अदिसिं छायंपि विवज्जतो डज्झइ उण्हेण मुच्छाई ।।२००||-२००२२३) इय अविहीपरिहारी नाणाईणं न होइ आभागी दव्वकुलदेसभावे विहिपरिहरणा इमा तत्थ ।।२०१६-२०१ २२४) ओयणसमिइमसत्तुगकुम्मासाई उ होति दव्वाई बहुजणमप्पजणं वा कुलं तु देसा सुरट्ठाई॥२०२।।-२०२ २२५) आयरऽणायर भावे सयं व अन्नेण वाऽवि दावणया एएसिं तु पयाणं चुपय तिपया व भयणा उ ।।२०२।।-२०३ २२६) अनुचियदेसं द स व्वं कुलमप्पं आयरो य तो पुच्छा बहुएवि नत्थि पुच्छा सदेसदविए अभावेऽवि ॥२०४॥-२०४ २२७) तुज्झट्ठाए कयमिणमन्नोन्नमवेक्खए यसविलक्खं वज्जति गाढरुट्टा का भे तत्तित्ति वा गिण्हे ।।२०५||-२०५२२८) गूढायारा न करेति आयरं पुच्छियावि न कहेति थोवंति व नो पुट्ठा तं च असुद्धं कह तत्थ ।।२०६||-२०६२२९) आहाकम्मपरिणओ फासुयभोईवि बंधओ होइ सुद्धं गवेसमाणो आहाकम्मेवि सो सुद्धो ॥२०७||-२०७२३०) संघुद्दिढ सोउं एइ दुयं कोइ भोइए पत्तो दिन्नंति देहि मज्झंतिगाउ सोउं तओ लग्यो ।२०८||-२०८ २३१) मासियपारणगट्ठा गमणं आसन्नगामगं खमगे सड्ढी पायसकरणं कयाइ अज्जेज्जिही खमओ॥२०९।।-२०९ २३२) खेल्लगमल्लगलेच्छारियाणि डिभग निमच्छ रुंटणया हंदि समणत्ति पायस घयगुलजुय जावणट्ठाए ।।२१०।।-२१०२३३) एगंतमवक्कमणं जइ साहू इज्ज होज्ज तिन्नो मि तणुकोट्टमि अमुच्छा भुत्तमि य केवलं नाणं ॥२११॥-२११२३४) चंदोदयं च सूरोदयं च रन्नो उ दोन्नि उज्जाणा तेसिं विवरियगमणे आणाकोवो तओ दंडो॥२१२।।-२१२ २३५) सूरोदयं गच्छमहं पभाए चंदोदयं जंतु तणाइहारा दुहा खी पच्चुरसंतिकाउं रायावि चंदोदयमेव गच्छे ।।२१३||-२१३ २३६) पत्तलदुमसालगया दच्छामु निवंगणत्ति दुश्चित्ता उज्जाणपालएहिं गहिया य हया य बद्धा य ॥२१४।।-२१४ २३७) सहस पइट्ठा दिट्ठ इयरेहि निवंगणत्ति तो बद्धा नितस्स य अवरण्हे दंसणमुभओ वहविसग्गा ||२१५||-२१५ २३८) जह ते दसणखी अपूरिइच्छा विणासिया रण्णा दिट्ठऽवियरे मुक्का एमेव इहं समोयारो ॥२१६।।-२१६ २३९) आहाकम्म भुंजइ न पडिक्कमए य तस्स ठाणस्स एमेव अडइइडो लुक्कविलुक्को जह कवोडो ।।२१७||-२१७२४०) आहाकम्मदारं भणियमियाणि पुरा समुद्दिट्ट उद्देसियंति वोच्छं समासओ तं दुहा होइ॥२१८||-२१८ २४१) ओहेण विभागेण य ओहे ठप्पं तु बारस विभागे उद्दिट्ठ कडे कम्मे एक्केकिक चउक्कओ भेओ॥२१९||-२१९ + २४२) जीवामु कहवि ओमे निययं भिक्खावि कइवई देमो इंदि हु नत्थि अदिन्नं भुज्जइ अकयं न य फलेइ ॥२२०॥-२२०२४३) सा उ अविसेसियं चिय मियंमि २ भत्तंमि तंडु चाउ ले छुहइ पासंडीण गिहीण व जो एहिए तस्स भिक्खट्ठा ॥२२१॥-२२१ २४४) छउमत्थोधुद्देस कहं वियाणाइ चोइए भणइ उवउत्तो गुरु एवं Me:55555555555555 श्री आगमगुणमंजूषा- १६०९5555555555555555555EOOK UGG明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明明听听听听听听听听听听听听TO

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