Book Title: Agam 15 Pannavana Uvangsutt 04 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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२०
पन्नवणा-41-1-1१८३
||१३३||-128
(१८३) सो होइ अहिगमरुई सुयनाणं जस्स अत्यओ दिर्बु एक्कारस अंगाई पइण्णगं दिविवाओय
॥१२७||-122 (१८४) दवाण सब्बभावा सव्यपमाणेहिं जस्स उवलद्धा सव्याहिं नयविहीहिं वित्थाररुइ ति नायव्यो
॥१२८11-123 (१८५) सण-नाण-चरिते तवविणए सधसमिइ-गुत्तीसु
जो किरियामावरुई सो खलु किरियाई नाम । ||१२||-124 (१८६) अणभिग्गहियकुदिट्ठी संखेवरुइति होइ नायव्यो
अविसारओ पवयणे अणभिग्गहिओ य सेसेसु ।१३०||-125 (१८७) जो अस्थिकायधम्म सुयधम्म खलु चरित्तधम्मच
सादहइ जिणाभिहियं सो धम्परुइत्ति नायब्बो १३१४-126 (१८८) परमत्यसंथवो वा सुदिट्ठपरमत्थसेवणा वा वि
यावण्ण-कुदंसणवज्जणा य सम्मत्तसद्दहणा । ||१३२॥-127 (१८९) निस्संकिय निक्कंखिय निवितिगिच्छा अपूढदिट्ठी य
उववूह थिरीकरणे वच्छल्ल पभावणे अट्ठ (१९०) से तं सरागदसणारिया, से किं तं वीयरागदंसणारिया-दुविहा पत्रत्ता तं जहाउवसंतकसायवीयरागदसणारिया खीणकसायचीयरागदसणारिया से किं तं उवसंतकसायवीयरागदंसणारिया-दुविहा पत्रत्ता तं जहा पढमसमयउवसंतकसायवीयरागदसणारिया अपढमसमयउवसंतकसायवीयरागर्दसणारिया अहवा चरिमसमवउवसंतकसायवीयरागदंसणारिया य अचरिमसमयउवसंतकसायवीयरागर्दसणारिया य, से किं तं खीणकसायवीयरागर्दसणारिया- दुविहा पन्नत्ता तं जहा-छउमस्यखीणकसायवीयरागदसणारिया य केवलिखीणकसाययीयरागदसणारिया य, से किं तं छउमत्थखीणकसायवीयरागदंसणारिया दुविहा पन्नत्ता तं जहा-सयंबुद्धछउमस्थखीणकसायवीयरागदंसणारिया य बुद्धबोहियछउमस्थखीणकसायवीयरागदसणारिया य, से किं तं सर्यबुद्धछउमस्थखीणकसायवीयरागदसणारिया-दुविहा पन्नता तं जहा-पढमसमयसयंबुद्धछउमस्थखीणकसायवीयराग- दसणारिया य अपदमसमयसयंबुद्धछउमत्थखीणकसायवीयरागर्दसणारिया य अहवा चरिमसमयसयंबुद्धछउमत्थखीणकसायवीयरागर्दसणारिया य अचरिमसमयसयंबुद्धछउमस्यखीणकसायवीयरागदसणारिया य, सेत्तं सयंबुद्धछउमत्थखीणकसायवीयरागदंसणारिया, से किं तं बुद्धबोहियछउमस्थखीणकसायवीयरागदसणारिया -दुविहा पत्रता तं जहापढमसमयबुद्धबोहियछउमस्थतीणकसायवीयरागर्दसणारियाय अपढमसमयबुद्धबोहियछउमत्थखीणकसायवीयरागदसणारिया य अहवा चरिमसमयबुद्धबोहियछउमत्थखीणकसायवीयरागदसणारिया य अचरिमसमयबुद्धबोहियछउमत्थखीणकसायवीयरागदसणारिया य से तं बुद्धबोहियछउमत्यखीणकसायवीतरागदंसणारिया सेत्तं छउमत्थखीणकसायवीयरागदंसणारिया
से किं तं केवलिखीणकसायवीतरागर्दसणारिया-दुविहा पत्रत्ता तं जहा सजोगिकेवलिखीणकसायवीतरागदसणारिया य अजोगिकेवलिखीणकसायवीतरागदंसप्पारिया य, से किं तं सजोगिकेवलिखीणकसायवीतरागर्दसणारिया-दुविहा पन्नता तं जहा-पढमसमयसजोगिकेवलिखीणकसायवीतरागदसणारिया अपढमसमयसजोगिकेवलिखीणकसायदीतरागदसणारिया य अहवा चरिमसमयसजोगिकेवलिखीणकसायवीतरागर्दसणारिया य अचरिमसमयसजोगि
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