Book Title: Agam 15 Pannavana Uvangsutt 04 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 100
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir प-१ उसिणजोणियाअसंखेजगणाअजोणियअनंतगुणासीतजोणियाअनंतगुणा ।१५०1-150 (३५८) कतिविहा णं मंते जोणी पन्नत्ता गोयपा तिविहा जोणी पन्नत्ता तं जहा-सचित्ता अचित्ता मीसिया नेरइयाणं मंते किं सचित्ता जोणी अचित्ता जोणी मीसिया जोणी गोयपा नो सचित्ता जोणि अचित्ताजोणी नो मीसियाजोणी, असुरकुमाराणं पुच्छा गोयमा नो सचित्ताजोणी अचिताजोणी नो मीसियाजोणी एवं जाव थणियकुमाराणं, पुदविकाइयाणं पुच्छा गोयपा सचित्ता विजोणी अचित्ता वि जोणी पीसिया वि जोणी एवं जाव चउरिदियाणं सम्मच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं सम्मुच्छिममणुस्साण य एवं चेव, गम्भवक्कतियपंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं गभव- क्कंतियमणुस्साण य नो सचित्ता नो अचित्ता मीसियाजोणी, वाणमंतर-जोइसिययेमाणियाणं जहा असुरकुमाराणं एतेसि णं भंते जीवाणं सचित्तजोणीणं अचित्तजोणीणं मीसजोणीणं अजोणीण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुला वा विसेसाहिया वा गोवमा सव्वत्थोवा जीवा मीसजोणिया, अचित्तजोणियाअसंखेनगुणा अजोणियाअनंतगुणा सचित्तजोणियाअनंतगुणा 1१५१1-151 (३५९) कतिविहा णं भंते जोणी पन्नत्ता गोयमा तिविहा जोणी पत्रत्ता तंजाह-संवुडाजोणी विपडाजोणी संवुडवियडाजोणी, नेरइयाणं मंते किं संवुडाजोणी विवडाजोणी संवुडवियडाजोणी गोवमा संवडा जोणी नो विडया जोणी नो संवुडवियडा जोणी एवं जाय वणस्सइकाइयाणं, बेइंदियाणं पुच्छा गोवमा नो संवुडाजोणी वियडाजोणी नो संवुडवियडाजोणी एवं जाव चउरिदियाणं सम्मुच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं सम्मुच्छिममणुस्साण व एवं चेव, गमवक्कंतियपंचेंदिय- तिरिक्खजोणियाणं गम्भवक्कंतियमणुस्साण य नो संवुडाजोणी नो विडयाजोणी संवुडविवडाजोणी, वाणमंतर-जोइसिय-वेमाणियाणं जहा नेरइयाणं, एतेसि णं भंते जीवाणं संवुडजोणियाणं वियडजोणियाणं संवुडवियजोणियाणं अजोणियाणं य कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा गोयमा सव्वयोवा जीवा संवुडवियडजोणिया, वियडजोणिया असंखेनगुणा अजोणिया अनंतगुणा, संवुडजोणिया अनंतगुणा ।१५२|-152 (३६०) कतिविहाणं मंते जोणी पन्नत्ता गोवमा तिविहा०-कुम्पुण्णया संखावत्ता बंसीपत्ता, फुम्मुण्णया णं जोणी उत्तमपुरिसमाऊणं कुम्पुण्णयाए णं जोणीए उत्तमपुरिसा गब्बेवक्कमति तं जहा-अरहंता चक्कयट्टी बलदेवा वासुदेवा, संखावत्ता णं जोणी इत्थिरयणस्स संखावताए णं जोणीए बहवेजीया य पोग्गला य बक्कमति विक्कमति चयंति उवचयंति नो चेव णं निष्फजंति वंसीपत्ता पंजोणी पिहुजणस्स वंसीपत्ताए णंजोणीए पिहुजणा गन्भे वक्कमंति।१५३1-153 • नवमं पर्य समत्त. दसमं चरिमपयं (३६१) कतिणंभंते पुढवीओ पनत्ताओगोयमाअट्ट पुढवीओपन्नत्ताओतंजहा-रयणप्पभा सक्करप्पमा वालुचप्पभा पंकप्पमा तमप्पभा तमतमप्पभा ईसीपडभारा, इमा णं मंते रयणप्पमा पुढवी किं चरिमा अचरिमा चरिमाइं अचरिमाइं चरिमंतपदेसा अचरिमंतपदेसा गोयमा इमा णं रयणप्पभा पुढवी नो चरिमा नो अचरिमा नो चरिमाई नोअचरिमाई नो चरिमंतपदेसा नो अवधिमंतपदेसा नियमा अचरिमं च घरिमाणि य चरिमंतपदेसा य अचरिमंतपएसा य एवं जाव अहेसतमा पुढदी सोहम्मादी जाच अनुत्तरविमाणा एवं चेव ईसीपभारा वि एवं चेव लोगे वि एवं For Private And Personal Use Only

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