Book Title: Vyakhyapragnapti Sutra
Author(s): Abhaydevsuri
Publisher: ZZZ Unknown
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व्याख्याप्रज्ञप्तिः अभयदेवीया वृत्तिः ॥५४२॥
स्वार्थस्य ख्यापनार्थ इति ।। अथोक्तभेदेन प्रत्याख्यानेन तद्विपर्ययेण च जीवादिपदानि विशेषयन्नाह| जीवा णं भंते! किं मूलगुणपच्चक्खाणी उत्तरगुणपञ्चक्खाणी अपञ्चक्खाणी?, गोयमा ! जीवा मूलगुणपच्च
७ शतके क्खाणीवि उत्तरगुणपञ्चक्खाणीवि अपञ्चक्खाणीवि | नेरइया णं भंते! किं मूलगुणपच्चक्खाणी० पुच्छा?, गोय
उदेशः२ मा! नेरइया नो मूलगुणपच्चक्खाणी, नो उत्तरगुणपच्चक्खाणी, अपच्चक्खाणी, एवं जाव चउरिदिया, पंचिंदिय
मूलगुणादि
प्रत्याख्यानं | तिरिक्खजोणिया मणुस्सा य जहा जीवा, वाणमंइरजोइसियवेमाणिया जहा नेरइया ॥ एएसि णं भंते ! सू०२७२ मूलगुणपञ्चक्खाणी उत्तरगुणपञ्चक्वाणी अपञ्चक्खाणी य कयरे २ हिंतो जाव विसेसाहिया वा?, गोयमा ! सम्वत्थोवा जीवा मूलगुणपच्चक्खाणी, उत्तरगुणपच्चक्खाणी असंखेजगुणा, अपञ्चक्वाणी अनंतगुणा । एएसि
णं भंते ! पंचिंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा, गोयमा ! सव्वत्थोवा जीवा पंचेंदियतिरिक्खजोणिया मूलगु| णपञ्चक्खाणी, उत्तरगुणपच्चक्खाणी असंखेजगुणा, अपच्चक्खाणी असंखिजगुणा । एएसिणं भंते ! मणस्सार्ण मूलगुणपञ्चक्खाणीणं०पुच्छा,गोयमा!सब्वत्थोवा मणुस्सा मूलगुणपच्चक्खाणी,उत्तरगुणपञ्चक्खाणी संखेजगुणा, अपच्चक्खाणी असंखेनगुणा जीवाणंभंते ! किं सव्वमूलगुणपञ्चक्खाणी देसमूलगुणपञ्चक्खाखी अपञ्चक्खाणी?, गोयमा! जीवा सव्वमूलगुणपच्चक्खाणी देसमूलगुणपच्चक्खाणी अपञ्चक्खाणीवि । नेरइयाणं पुच्छा, गोयमा !
॥५४२॥ नेरइया नो सव्वमूलगुणपच्चक्खाणी, नो देसमूलगुणपञ्चक्खाणी,अपच्चक्खाणी, एवं जाव चउरिंदिया। पंचिंदि
Cloआ०२९ यतिरिक्खपुच्छा, गोयमा! पंचिंदियतिरिक्ख० नो सव्वमूलगुणपच्चक्खाणी, देसमूलगुणपञ्चक्खाणी अपञ्चक्खा
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