Book Title: Jain Sahitya Sanshodhak Part 1
Author(s): Jinvijay
Publisher: Jain Sahitya Sanshodhak Samaj Puna
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१०८
जैन साहित्य संशोधक
॥ ओं नमः ॥ | दूहा |
रिषभादिक चडवीस जिन पुण्डरीक गणधार । मन वच काया एक कर प्रणमु वारंवार ॥ १ विघन हरण संपतिकरण श्रीजिनदत्तसुरिंद | कुशल करण कुशलेश गुरु बन्दु खरतर इंद ॥ २ जाके नाम प्रभावतै प्रगटे जय २ कार ।
[भाग १
सानिवकारी परम गुरु सदा रहो निरधार ॥ ३
संवत् १८९१ रामिति श्राषाढ सुदि ५ दिने श्रीजेसलमेरु नगरे महाराजाधिराज महारावलजी श्री १०८ श्रीगजसिंघजी राणावत श्रीरूपजी बापजी विजयराज्ये बृइत्खरतर भट्टारकगच्छे जंगमयुगप्रधान भट्टारक श्रीजिनहर्षसूरिभिः पट्टप्रभाकर जं । यु । म । श्री १०८ श्री जिनमहेन्द्रसूरि उपदेशात् श्रीबाफणागोत्रे देवराजजी तत्पुत्र गुमानचंदजी - भार्या जेतां । तपुत्र ५ - (१) वहादरमलजी - भार्या चतुरां । (२) सवाईरामजी -- भार्या जीवां । ( ३ ) मगनीरामजी - भार्या परतापां । ( ४ ) जोरावरमलजी - मार्या चोथां । ( ५ ) प्रतापचंदजी - भार्या मानां । एवं बादरमलजी तत्पुत्र १) दानमल्लजी ( २ ) सवाईरामजी तत्पुत्र सामसिंघ, माणकचंद | सामसिंहपुत्र रतनलाल | (३.) मगनीरामजी तत्पुत्र चभूतसिंघजी । तत्त्र २ पूनमचंद दीपचंद | ( ४ ) जोरावरमलजी तत्पुत्र २ सुरतांनमल चनणमल । सुरतानमल पुत्र २ गंमीरचंद्र इंद्रचंद्र | ( ५ ) प्रताप चंदनी पुत्र ३ हिमतराम जेठमल - नथमल । हिमतरामपुत्र जीवण । जेठमल पूत्र मूलो । गुमानचंदजी पुत्र्यां २ झचू-चीजू । सवाई रामजी पुत्र्यां ३ सिरदारी - सिणगारी - जांनुडी । मगनीरामजी तत्पुत्र्यां २ हरकवर हस्तू | सपरिवार सहितेन सिद्धाचलजीरो संघ काढयो । निणरी विगत
नेशलमेर उदैपुर कोटे कुंकुमपत्र्यां सर्व देसावरांमे दीनी । च्यार २ जमण कोया नालेर दीया पर्छे संघ पाली मेलो हूवो । उठे नीमण ४ कीया । संघतिलक करायो । मिति महासुदि १३ दिने म । श्रीजिनमहेन्द्रसूरिजी श्रीचतुर्विधसंघसमक्षे दीयो । पछे संघ प्रयाण कीयो । मार्गमें देशना सुणतां पूजा पडिकमणादि करतां साते क्षेत्रांमें द्रव्य लगावतां जायगा २ सामेला होतां रथजात्रा प्रमुख महोच्छव करतां । श्रीपंचतीर्थीनी वांभणचाडजी आबूजी जीरावलजी तारंगेजी संखेश्वरजी पंचासरजी गिरनारजी तथा मारगमा हे सहरांरा गामांरा सर्व देहरा जुहारचा । इणमांत सर्व ठीकाणे मंदिर २ दीठ चढापो कीयो । मुगट . कुंडल हार कंठी भुजबंध कडा श्रीफल नगदी चंद्रवा पुठीया इत्यादिक मोटा तीर्थमाथे चढापो घणो हुवो । गहण सर्व जडाउ हो सर्व ठिकाण लांइण जामण कीया सहसावनरा पगथीया कराया । उठेसु सात कोष ठेरे - गामसुं श्रीसिद्धगिरीजी मोत्यां बधायने पालीताणें बड़ा हगामसुं गाजावाजतां तलेटीरो मंदिर जुहार डेरां दाखल हुवा । दुने दिन मिती

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