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पूर्णकी भाषा अपने-आपमें सब पूर्ण हैं । अपूर्णता तब आती है, जब एक-दूसरेमें लगाव होता है । वक्ताके बिना श्रोता और श्रोताके बिना वक्ता अपूर्ण है । दृश्य के बिना दर्शक और दर्शकके बिना दृश्य अपूर्ण है। अपनेआपमें कोई अपूर्ण नहीं है और दूसरेसे लगाव रखकर कोई पूर्ण नहीं है।
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भाव और अनुभाव
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