Book Title: Prakrit Sahitya Ka Itihas
Author(s): Jagdishchandra Jain
Publisher: Chaukhamba Vidyabhavan

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Page 797
________________ ७९० प्राकृत साहित्य का इतिहास अक्षरार्थ १९३ अजियसंतिथव (अजित शांतिस्तत्र) अक्षपाट २२२ ५७०, ६५२,६५३ अक्षरमात्रबिंदुच्युत ५३६, अजीवकल्प ३३ (नोट), १२९, १३० अक्षीणमहानस २८६ अज मंगू (आयं मंगू) २०३, २०७, २२० अगडदर्दुर ८१ अज्जा८१ अगड (मह) १४० अज्जुका ६२७ अगडदत्त १९९, २६८ अगडदत्त (मुनि)३८५ अज्ञानवाद ५२, ५४ अगस्स्य ६७८ अज्ञानवादी ७४, २०२ अगस्त्यसिंह १७४, १९५ (नोट), १९८, 'अटि पुटि रटिं' (आंध्र में) ४२८ २५५ अट्ठविडअ ४२९ अग्रायणी ३५ (नोट), १३०, २८८, अट्ठम (तप) ५५९ ३२४, ६७४ अटियगाम (अस्थिग्राम) १५६, ३५४, ५५४, अग्निपरीक्षा ५३४ अठारह पापस्थान ५६७ अग्मिभीरु (रथ) ४६४ 'अडि पाडि मरे' (कर्णाटक में) ४२७, अग्निहोत्रवादी २०२ अडिला ६५१ अग्निवेश्यायन २०७ (नोट) 'अड्डे' (का प्रयोग गोल में) ४२७ अनिशर्मा (शिष्य) ४१७ अणमिसा ११३ (नोट), १७७ अग्घकंड (अर्घकांड)६७८ अणहिलपुर (अणहिल्लपाट-पाटण) १०५, अग्र महिषियों (कृष्ण की) ५६७ ३५३, ३५४,३७३, ४९३, ५९९ अघोर (योगीन्द्र) ४७३ अणाढिय देव ३८३ अचिरावती (एरावती) ६० अणिरुद्ध ५७३ अचेलक १४२ अणीयस ८९ अचेलस्व २७०, ३०० अणुवेक्खा ३०१ (नोट) अचेल मुनि ४७ अणुजोगगत ९९ अच्छ (छा)६५, ११४ (नोट) अणुयोगद्वार ( अनुयोगद्वार ) ३३ अछिद्र २०७(नोट) (नोट), ३५, ३८, १८८, १९०, अजयमेरु ३७३ १९७, १९८, २७५, ३६०, ३७६ अजातशत्रु १०७ अणुव्रतपालन ४९८ अजानती २२१ अणुत्तरोववाइयदसाओ (अनुत्तरोअजित (यक्ष)२९५ पपातिक) २४२, ६१, ९०, ९५, अजितनाथ ५२९ २७२,३५२ अजितसिंह ५२६ अतिथि ५९ अजितकेसकंबली ६४ (नोट) अस्थसस्थ (अर्थशास्त्र) ९३, १८९ अजितब्रह्म ३२६ (नोट), २४९, ३७०, ३८०, ३८६, अजित ब्रह्मचारी ३२६ .. ४१६, ६६७, ६६८

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