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तीस आवर्तन प्रति सेकेंड से वह करीब चौदह से अठारह आवर्तन प्रति सेकेंड तक आ जाती है। तुम सजग होते हो, लेकिन निष्क्रिय होते हो। एक गहन विश्राम तुम्हें घेरे रहता है।
सारे ध्यानी जब वे ध्यान करते हैं या प्रार्थना करते हैं तो इसी दूसरी लय में, 'अल्फा' लय में उतर जाते हैं। संगीत सुनते हुए भी यह घट सकती है। वृक्षों को देखते हुए, चारों तरफ फैली हरियाली को देखते हुए भी यह घट सकती है। कुछ विशेष न करते हुए बस मौन बैठे हुए भी यह घट सकती है।
और एक बार तुम जान लेते हो इसका ढंग, तो तुम मन की क्रिया को शिथिल कर सकते हो; तब विचार बहुत भाग-दौड़ नहीं करते। वे चलते हैं, वे होते हैं वहां, लेकिन वे बड़ी धीमी गति से चलते हैं,
जैसे बादल तैर रहे हों आकाश में वस्तुत: कहीं जा नहीं रहे, बस तैर रहे हैं। यह दूसरी अवस्था, 'अल्फा' अवस्था, बड़ी कीमती अवस्था है।
इस दूसरी के पीछे होती है तीसरी अवस्था, सक्रियता और भी कम हो जाती है। वह अवस्था 'थीटा' कहलाती है-आठ से चौदह आवर्तन प्रति सेकेंड। यह वह अवस्था है जिससे तुम तब गुजरते हो जब तुम्हें रात नींद आ रही होती है, उनींदापन घेरे होता है। जब तुम शराब पी लेते हो, तब तुम इसी तंद्रा से गुजरते हो। देखना किसी शराबी को चलते हुए : वह तीसरी अवस्था में होता है। वह बेहोशी में चल रहा है। कहां जा रहा है वह, उसे कुछ पता होता वह क्या रहा है, कुछ स्पष्ट बोध नहीं है। शरीर काम किए जाता है यंत्र-मानव की भांति। मन की सक्रियता इतनी धीमी पड़ जाती है कि वह करीबकरीब नींद की सीमा पर ही होता है।
बहुत गहरे ध्यान में भी यह बात घटेगी-तुम 'अल्फा' से 'थीटा' में उतर जाओगे। लेकिन ऐसा केवल बडी गहरी अवस्थाओं में ही घटता है। साधारण ध्यानी इसका स्पर्श नहीं कर प्राते। जब तम इस तीसरी अवस्था को स्पर्श करने लगते हो तो तुम बहुत आनंद अनुभव करोगे।
और सारे शराबी इसी आनंद को उपलब्ध करने की कोशिश कर रहे होते हैं, लेकिन वे चूक जाते हैं, क्योंकि आनंद केवल तभी संभव है यदि तुम इस तीसरी अवस्था में पूरी सजगता से उतरते होनिष्क्रिय लेकिन सजग। शराबी उस अवस्था तक पहुंचता है, लेकिन वह बेहोश होता है; जब वह वहां पहुंचता है, वह बेहोश होता है। अवस्था मौजूद होती है, लेकिन वह उसका आनंद नहीं ले सकता; उसमें प्रसन्न नहीं हो सकता; उसमें विकसित नहीं हो सकता। सारे संसार में सब तरह के मादक द्रव्यों के लिए आकर्षण इसी 'थीटा' अवस्था के आकर्षण के कारण है। लेकिन यदि तुम रासायनिक पदार्थों दवारा उस तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हो तो तुमने गलत साधन चुना है। व्यक्ति को इस अवस्था तक मन की सक्रियता को धीमा करके ही पहंचना होगा और सजग बने रहना होगा।
फिर चौथी अवस्था है; वह 'डेल्टा' कहलाती है। सक्रियता अब और कम हो जाती है. शून्य से चार आवर्तन प्रति सेकेंड। मन करीब-करीब रुक गया होता है। ऐसे क्षण होते हैं जब वह शून्य-बिंदु छू लेता है, एकदम रुक गया होता है। यहीं तम गहरी नींद की अवस्था में डूब जाते हो, जब स्वप्न भी