Book Title: Agam 18 Jambudivapannatti Uvangsutt 07 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

View full book text
Previous | Next

Page 25
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir जगदीप पन्नती-२/४ महव्ययाई समावणगाई छन्च जीवणिकाए धम्मे देसमाणे विहरति तं जहा-पुदविकाइए भावणागमेणं पंच महव्वयाइंसमावणगाई भाणियव्वाइं उसभस्म णं अरहओ कोसलियस्स चउरासीति गणहरा होत्या उसमस्स णं अरहओ कोसलियस्स उसभसेणपामोक्खाओ चुलसीइं समणसाहस्सीओ उक्कोसिया समणसंपया होत्या उसमस्स णं अरहओ कोसलियस्स बंभी-सुंदरीपामोक्खाओ तिण्णि अजियासयसाहस्सीओ उक्कोसिया अञ्जियासंपया होत्या उसभस्सणं अरहओ कोसलियस्स सेज्जंसपामोक्खाओ तिण्णि समणोवासगसयसाहस्सीओ पंच य साहस्सीओ उक्कोसिया समणोवासगसंपया होत्या उसभस्म णं अर-हओ कोसलियस्स सुभद्दापामोक्खाओ पंच समणोवासियासयसाहस्सीओ चउपनं च सहस्सा उक्कोसिया समणोवासियासंपया होत्या उसभस्स णं अरहओ.कोसलियम्स.अजिणाणं जिंणसंकासाणं सबक्खरसन्निवाईणं जिणो विव अहितहं वागरमाणाणं चत्तारि चउद्दमपुव्वीसहस्सा अखामा य सया उनकोसिया चउदसपुदीसंपया होत्या उसमस्स णं अरहओ कोसलियस्स नव ओहिनाणिसहस्सा उनकोसिया ओहिनाणिसंपया होत्था उसमस्स णं अरहओ कोसलियस्स-वीसं जिणसहस्सा वीसं वेउब्बियसहस्सा छच्च सया उकूकोसिया वारस विउलमईसहस्सा छच्च सया पन्नासा बारस वाईसहस्सा छच्च सया पत्रासा उसमस्स णं अरहओ कोसलियस्स गइकल्लाणाणं ठिइकल्लाणाणं आगमेसिपहाणं बावीसं अनुत्तरोववाइयाणं सहस्सा नव य सया उप्तमस्स णं अरहओ कोसलियस्स वीसं समणसहस्सा सिद्धा चत्तालीसं अनियसहस्सा सिद्धा-सर्हि अंतेवा-सीसहस्सा सिद्धा अरहओणं उसभस्स घहवे अंतेवासी अणगाराभगवंतो अप्पेगइया मासपरियायाएवं जहा ओववाइए सचेव अणगारवण्णओ जाय उड्ढे जाणू अहोसिरा झाणकोटोवगया संजमेणं तवसा अपाणंभावमाणा विहरंति अरहओ णं उसमस्स दुविहा अंतकरभूमी होत्या तं जहा-जुगंतकरभूमी य परियायतकरभूमी य जुगंतकरभूमीजाव असंखेजाई पुरिसजुगाइं परियायंतरकभूमीअंतोमुहत्तपरियाए अंतमकासी।३२|-31 (४५) उसभे णं अरहा पंचउत्तरासाढे अभीइछट्टे होत्या उत्तरासाढाहिं चुए चइत्ता गब्मंदकंते उत्तरासादहिं जाए उत्तरासादाहिं रायाभिसेयं पत्ते उत्तरासाढाहिं मुंडे पवित्ता जाव पव्यइए उत्तरासादाहिं अनंते जाय केवलवरनाणदंसणे समुप्पने अभीइणा परिणिब्युए।३३1-32 (४६) उसमे गंअरहा कोसलिए बजरिसनारायसंघयणे समचउरससंठाणसंठिएपंच धणसयाई उड्ढे उच्चत्तेणं होत्या उसमे णं अरहा कोसलिए वीसं पुबसयसहस्साई कुमारवासपज्झावसित्ता तेवट्ठि पुव्वसयसहस्साई रजयासमझावसित्ता तेसीई पुव्यसयसहस्साई अगारवासमज्झावसित्ता मुंडे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पब्बइए उसमे णं अरहा कोसलिए एगं वाससहस्सं छउमत्यपरियायं पाउणित्ता एग पुव्वसयसहस्सं वाससहस्सूणं केवलिपरियायं पाउणित्ता एग पुव्यसयसहस्सं बहुपडिपुत्रं सामण्णपरियायं पाउणित्ता चउरासीई पुव्वसयसहस्साई सव्वाउयं पालइत्ता जेसे शेमंताणं तच्चे मासे पंचमे पक्खे माहबहले तस्स णं माहबहुलस्स तेरसीपक्खणं दसहिं अणगारसहस्सेहिं सद्धिं संपरिवुडे अट्ठावयसेलसिहरंसि चोइसमेणं भत्तेणं अपाणएणं संपलियंकणिसण्णे पुचण्हकालसमयंसि अभीइणा नक्खत्तेणं जोगमुवागएणं सुसमदूसमाए समाए एगूणणउतीहिं परखेहिं सेसेहिं कालगए वीइक्कंते जाव सव्वदुक्खप्पहीणेज समयं च णं उसमें अरहा कोसलिए कालगए वीइक्कंते समुझाए छिण्णजाइ-जरा-मरण-यंधणे सिद्धे बुद्धे मुत्ते अंतकडे परिनिबुडे सव्य-दुक्कप्पहीणे तं समयं वणं सक्कस्स देविंदस्स देवरण्णो For Private And Personal Use Only

Loading...

Page Navigation
1 ... 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130