Book Title: Agam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Part 13 Sthanakvasi
Author(s): Ghasilal Maharaj
Publisher: A B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
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भगवतीस्त्रे शीताः देश उष्णो देशः स्निग्धः देशो रूक्षः १, सों मृदुको देशो गुरुको देशो लघुको देशाः शीताः देश उष्णो देशः स्निग्धो देशाः रूक्षाः २, सों मृदुको देशो गुरुको देशो लघुको देशाः शीताः देश उष्णो देशाः स्निग्या देशो रूक्षः३, सो मृदुको देशो गुरुको देशो लघुको देशाः शीताः देश उष्णो देशाः स्निग्धाः उष्णः, देशः स्निग्धः, देशो रूक्षः १' यह इसका प्रथम भंग है-इसके अनुसार वह सर्वांश में मृदु, एकदेश में गुरु, एकदेश में लघु, अनेक देशों में शीत, एकदेश में उष्ण, एकदेश में स्निग्ध और एकदेश में रूक्ष स्पर्शवाला होता है १, द्वितीय भंग इस प्रकार से है-'सर्वः मृदुका, देशो गुरुकः, देशो लघुकः, देशाः शीनाः, देश उष्णः, देशः स्निग्धो, देशाः रूक्षाः २' इसके अनुसार वह सर्वाश में मृदु, एकदेश में गुरु, एकदेश में लघु, अनेक देशों में शीन, एकदेश में उष्ण, एकदेश में स्निग्त्र और अनेक देशों में रूक्ष स्पर्शवाला हो सकता है २ तृतीय भंग इस प्रकार से है-'सर्वः मृदु का, देशो गुरुकः, देशो लघुका, देशाः शीता, देश उष्णः, देशाः स्निग्धाः, देशो रूक्षः' इसके अनुसार वह सर्वाश में मृदु' एकदेश में गुरु, एकदेश में लघु, अनेक देशों में शीत, एकदेश में उग, अनेक देशों में स्निग्ध और एकदेश में रूक्ष स्पर्शवाला हो सकता है ३, चतुर्थ भंग इस प्रकार से है-'सर्वः मृदुका, देशो गुरुका, देशो लघुकः, देशाः शीनाः, देश उष्णः, देशाः स्निग्धाः, देशाः रूक्षाः ४' इसके अनुसार वह सर्कश में मृदु, एकदेश में गुरु, એક દેશમાં લઘુ અનેક દેશમાં શીત એકદેશમાં ઉષ્ણુ અનેક દેશોમાં સિનગ્ધ અને એક દેશમાં રૂક્ષ સ્પર્શવાળે હોય છે. એ રીતે આ પહેલે ભંગ છે.૧ 'सर्व: मृदुकः देशो गुरुकः देशो लघुकः देशाः शीताः देश उष्णः देशः स्निग्धः देशाः रूक्षाः२' अथवा ते पोतना सशियी भृढ देशमा १३ એકદેશમાં લઘુ અનેક દેશમાં શીત એકદેશમાં ઉણુ એકદેશમાં સ્નિગ્ધ અને અનેક દેશોમાં રૂક્ષ સ્પર્શવાળ હોય છે. એ રીતે આ બીજો ભંગ છે.૨ An a 'सर्वः मृदुकः देशो गुरुकः देशो लघुकः देशाः शीताः देश उष्णः देशाः स्निग्धाः देशो रूक्षः३' पोताना सशिथी भृदयेशमा ४३ देशमा લઘુ અનેક દેશમાં શીત એકદેશમાં ઉણ અનેક દેશમાં સ્નિગ્ધ અને એકशिमा ३६ २५ वाले डाय छे. मात्री 1 छ. 3 अथवा ते 'सर्वः मदकः, देशो गुरुकः देशो लघुकः देशाः शीताः देश उष्णः देशाः स्निग्धाः देशाः रूक्षाः४' पोताना शिथी भृ शमा २३ देशमा सधु भने देशमा
શ્રી ભગવતી સૂત્ર : ૧૩

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