Book Title: Shrutsagar Ank 038 039
Author(s): Hiren K Doshi
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba

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Page 14
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir १२ दृष्टांत द्वारा अविचारी कार्य न करवानुं सूचन करे छे. 'छटकी छेह इम नवी दीजै, फुंदि परें किम कुदीजै ? अबला एहं नवी कीजे रे, एह संदेशो जई केज्यो ||५|| 'दीवानी ज्योत पर पतंगियुं वगर विचार्ये कूदी पड़े छे, तेम तमे पण प्रियतमानो विचार कर्या विना ज तेने एकली छोडी योगी बनी चाल्या गया?' मार्च-अप्रैल २०१४ मागसर : मागसर मासमां नायिका अविचारी पगलुं न भरवानुं सूचन करे छे. त्यार पछी पोतानी भूलो (दोष) दर्शाववानी विनंती करी नम्रता दाखवे छे जेथी नेमजी वचन पाळीने शीघ्र घरे पाछा फरे. - पोष : पोष महिनो एटले शिशिरऋतु आ ऋतुमां कामिनी पोताना कंत साथे विविध क्रीडाओ करी यौवनरसने माणे छे. तेवा टाणे प्रियतमनुं पोतानाथी दूर रहेवुं ते प्रियतमाने खूब आकरुं लागे छे. शीतकाळे प्रियतमा पोताना प्रियतमने शरीरनी संभाळ राखवानुं सूचन करी पत्नीधर्म बजावे छे. 'ए दिन काया पोषइ, तप करी तनू नवी शोषइ ।1 (मास - २, क. २) पोष मासनी सखत ठंडीथी रक्षण मेळववा लोको मेवा-मीठाइ जेवा पौष्टिक आहार ग्रहण करी तननुं पोषण करे छे, तेवा समये उपवास इत्यादि तप करीने प्रियतमना तनने सुकवी नाखचुं प्रियतमाने बिलकुल रुचतुं नथी. लोकव्यवहारमां आजे पण शिशिर ऋतुमां सूकामेवा, अडदीया, खजूरपाक, गुंदरपाक जेवा पकवानो खवाय छे. अहीं ते समयनी खान-पान विगेरे लोकजीवननी शैलीनो बोध मेळवी शकाय छे. महा : महा महिनामां शीतळता अनुभवाय छे. शियाळानी लांबी लांबी रात्रिओ विरहिणी स्त्रीने वरस जेटली लांबी लागे छे. रात्रिना समये विरहानलना कारणे आ नेत्रो बीडातां नथी अर्थात् नायिकानी उंघ वेरण बनी छे. 'नाह विण माहनी रेण, किमही न जाइ रे, तलपणां अणमिष नेण, वरस सो थाइ रे ।। ( मास-३, क. १) For Private and Personal Use Only उपरोक्त पंक्तिओमां नायिकानी विरह वेदना अत्यंत वृद्धि पानी छे, पोताना वालेश्वरने संदेशो आपतां कहे छे : 'तमे घरे आवी षट्सयुक्त भोजन आरोगो तेमज नवसेर वाळो हार पहेरो शीतऋतुमां सजावेली शय्या पण सूनी पडी छे. हे प्रितम ! तमे जल्दी घरे आवो ।। (क. २) प्रियतमा कागडोळे प्रियतमनी वाट जुवे छे. लोकपरंपरामां पण शीतकाळे

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