Book Title: Gautam Nam Japo Nishdish
Author(s): Dharnendrasagar
Publisher: Mahavir Jain Aradhana Kendra Koba
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तेजोराशिरुदात्तविंशतिभुजो यक्षाधिपः श्रीः सुराधीशाः शासनदेवताश्च ददतु श्रेयांसि भूयांसि नः.......... ।।१२।। १०. श्री जिनप्रभसूरिप्रणीतं श्रीगौतमस्तोत्रम्
जम्मपवित्तियसिरि-मगहदेस अवयंसगब्बरगाम। गोयमगुत्तं सिरिइंदभूइगणहारिणं नमिमो......................... | 19 ।।
वसुभूइकुलविभूसण! जिट्ठाउडुजाय! कंचणच्छाय!।
पुहवीउअर-सरोरुहमराल! तं जयसु गणनाह!............. ।।२।। समचउरंसागिइमय! संघयणं वज्जरिसहनारायं । कलयं ते कावि सिरी देहे तुह सत्तकरतुंगे... .................... ।।३।।
सह दसदिएहिं जण्णं मज्झिमपावाइ तुह कुणंस्स। ___ माणो विहु वोहिफलो अहेसि तुह वीरदसणओ.... ..........।।४।। वेयपयत्थे तुह जीवसंसए जिणवरेण विच्छिन्ने । निक्खंतो तं पहु! लहु पंचहिं सह खंडिअसएहिं................ ।।५।।
वइसाहसुद्धइक्कारसीइ पुव्वण्हदेसकालंमि ।
महसेणवणे पण्णासवच्छरंतेसि पव्वइओ. ....... । ।।६।। गिहिभावे जं तुमए सम्म आराहिओ महावीरो। तेण ब्भासेण तमेव सेवसे समणभावेवि......................... ।।७।।
पण्णासलिले खित्तो जिणेण तिपइक्कतिल्लविंदू ते ।
वित्थरिओ तह तक्खण दुवालसंगप्पणयणेण ......... ।।८।। इगवीससयक्खरसूरिमंतसवणाउ झत्ति संजाया । आमोसहि-विप्पोसहिपमुहा तुह लद्धिरिंछोली.................... ।।९।।
तुह अंगं फरिसिय जं फासइ पवणो जलासयाण जलं । तं पीऊण मणुस्सा उविंति छम्मासमारुगं............... ।।१०।।
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