Book Title: Upang Prakirnak Sutra Vishaykram
Author(s): Sagaranandsuri, Anandsagarsuri
Publisher: Jain Pustak Pracharak Samstha
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औ०१९ रा० २० जी० २१॥ प्रज्ञा०२२ ॥६२॥
सर्य/२३
चं०/२४ जं० २५ नि० २६ प्रकी०२७
वसिऊण व सुहिमज्झे २७-१६१२ वाणमं० जहा असुरकुमाराणं २२-२१२सू० विजयस्स पं० उभओ० दो दो २१-१३२
वि जणमझे २७-१७८९ ।,, पं० केवइयं० ठिई २२-१००सू० | , उवरिपागारा २१-१३४सू० , विमाणेसु य २७-१६२३ वायगवरवंसाओं
| विजयं च येजयंतं २७-१११२ विचित्तसु अ २७-१६२६ | वायामित्तणवि जत्थ' २७-७८० |विजया णं राय० चत्ता० २१-१३७सू० , सुरनरीसर २७-१६२५ वारुणवरणं समुदं खीर० २१-१८२सू० |विजया वेजयंति : २५-९६ वसियं दरीसु वसियं २७-२६३३ | वाससयं परमाउं
२७-५२३ , वेजयंती
२५-६४ वसुहर गुणहर जयहर २५-२१ | वाससयाउयमेयं
विजया य विजयंता , २४-२२ वंसाणं जिणवंसो. २७-५९२ | वाससयाउस्सेए
२७-५२० विजये णं अट्टसतचकद्धयाणं २१-१३३सू० वंसे वेच्छू कणए
२२-३६ वाससहस्सं पलिओवौ २७-२०८७ |विजा जहा पिसाय वाइंगणि सल्लइथुडई
| वाससहस्सा संखा २१-८९ | विजाणं धारण कुजा २७-८७५ वाउकुमारिंदाणं
२७-९५२ | वासाणं० मासं कति णक्खत्ता विजावि भत्तिमन्तस्स २७-३४७ वाउसुवर्णिणदाणं २७-९७८
२५-२६३सू० विणओवयार माणस्स २७-१३१८ वाण सोहम्मीसाणा य जहा असुर० | वासारत्तंभि तवो ।
| विणए वेयावच्च
२७-१३६३ २२-१४३सू० वाहिजरमरणमयरो २७-२९१ |विणओवयार ओवहम्मियाइ २७-९३९ वाणमंतर कओहिंतो उव०२२-१३५सू० | विग्गहगए य सिद्धे २७-१७७८ |विणयपणएहि सिढिल २७-९३३ वाणमंतरा ओगाहणट्टयाए २२-११०सू० | विजउ पंचंगुलिओ २७-८९७ विमले वितत विवत्थे २४-९५ वाणमंतरा० जहा असुरकु०२२-२१७सू० । विजयस्स० उभओ० दो दो २१-३१० | विरसं आरसमाणो २७-२७९८
॥ ६२॥

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