Book Title: Prakrit Suktaratnamala
Author(s): Puranchand Nahar
Publisher: Puranchand Nahar

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Page 17
________________ प्राकृत- सूक्तरतमाला । अलसायंतेणवि सज्जणेण जे अक्खरा समुल्लविया । ते पत्थरेसु टंकुल्लिहियव्व न हु अन्नहा हुंति ॥ ७ ॥ अलसायमानेना सज्जनेन यान्यक्षराणि समुल्लपितानि । तानि पाषाणेषु टोल्लिखितानीव न खल्वन्यथा भवन्ति ॥७॥ The words spoken by a good man even in an idle mood, never turn out inaccurate like something engraven on a piece of stone by a chisel. मित्ती परोवयारो सुसीलया अज्जवं पियालवणं । दक्खिण्ण-विणय चाया सुयणाण गुणा निसग्गेण ॥ ८ ॥ मैत्त्री परोपकारः सुशीलताऽऽर्जवं प्रियालपनम् । दाक्षिण्यविनयत्यागाः सुजनानां गुणा निसर्गेण ॥ ८ ॥ Friendship, benevolence, good conduct, sincerity pleasing words, generosity, modesty and self-sacrifice these qualities are innate in the good. वाया सहस्समहिअं सिणेह - निज्झाइअं सयसहस्सं । सब्भावो पुण उज्जु-जणस्स कोडिं विसेसेइ ॥ ६॥ वाक् सहस्रमधिकं स्नेहनिध्यातं च शतसहस्रम् । सद्भावः पुनरजुजनस्य कोटिं विशेषयति ॥ ६ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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