Book Title: Dharm vidhi Prakaranam
Author(s): Udaysinhsuri, Shreeprabhsuri
Publisher: Hansvijayji Library
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धर्मविधि ॥१२७॥
प्रारणम्
त्ति सा अन्जा । तप्पडिबोहनिमित्तं, तं बाल उल्लबइ एवं ॥ ६४४॥ बालय ! माया सि तुमं, पुत्तसुओ देवरो सि तणओ सि । भत्तिज्जो पित्तियगो, इय मज्झ हवेसि एगो वि ॥ ६४५॥ जो ते बालय ? जणी, सो मज्झ हवेइ सोयरो नृणं । जणओ पियामहो तह, भत्ता ससुरो य तणो य ।। ६४६ ॥ जा बालय ! ते माया, सा मह माया हवेइ सासू य । भाउज्जाया य वहु, पियामही तह सवक्की य ॥ ६४७ ॥ अह तं कुबेरदत्तो, सोउं जपइ किमेरिसं अज्जे ? । अन्नुन्नविरुद्धत्यं, पभणसि नणु विम्हओ मज्झ ॥ ६४८ ॥ अज्जा जंपइ बालो, मह भाया भद्द ? एगजणणी जं । पुत्तसुओ पुण एसो, सविक्क(वक्कि) पुत्तेण जं जाओ ॥ ६४९ ॥ तह देवरो वि एसो, मह पइणो सोयरो हवइ जम्हा । तणओ पुण अक्खाओ, जं पुत्तो भत्तुणो मज्झ ॥ ६५० ॥ भत्तिज्जओ वि एवं, भणिओ जे मज्झ भाउणा तणो । पित्तियगोवि हवेई, जं जणणी भत्तुणो बंध ॥ ६५१ ॥ जो भद्द ? इमस्स पिया, सो मह भाया सहोयरत्तेण । जणओ वि मए भणिओ, एसो जणणीपइत्तेण ॥ ६५२ ॥ उग्धोसामि पियामह-मेयं चिय पित्तियस्स पियरं ति । अहमिमिणा परिणीया, ता एस पई मए वुत्तो॥ ६५३॥ तणओ विमए भणिओ, जे एस सबक्विकुक्खिसंभूओ । ससुरो हवेइ एवं, जमिमो मह देवरस्स पिया ॥६५४॥जा बालयस्स माया, सा माया मज्झ जेण तजा है । तह सासुया हवेई, एसा जे भत्तुणो जणणी ॥६५५।। भाउज्जाया भणिया, मए इमा बंधवस्स घरिणि त्ति । वुत्ता वहूवि एसा, सवकिपुत्तस्स ज भज्जा ॥६५६॥ एसा पियामही पुण, मह पित्तियगस्स होइ जं जणणी । भणिया इमा सवक्की, जं भज्जा भत्तुणो बीया ॥६५७॥ इय बालयस्स पुरओ, पढियं गाहातिगं जहकमेण । विवरिय अक्खइ अज्जा, धम्मं च कुबेरदत्तस्स ॥ ६५८ ॥ तो पुखगोवियं तं, आकड्ढयमुद्दियं समप्पड़ य । तं दटुं सो सब, जाणइ संबंधविप्पलयं ॥ ६५९।।
॥१२७॥

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