Book Title: Bhagwati Sutra Part 12
Author(s): Ghasilal Maharaj
Publisher: A B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti

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Page 637
________________ प्रमैयर्यान्द्रका टीका श०१८ उ०२ सू०१ कात्तिकश्रेष्ठिनश्चरमत्वनिरूपणम् - ६१९ मेढी पमाणं आहारो आलंबणं चक्खूमेढीभूए पमाणभूए आहार ए आलंबणभूए चक्खभूए सबकज्जवडावए यावि होत्था' इति, मन्त्रेषु च देशहितचिन्तार्थ राज्यादिहितचिन्तार्थ चैकान्तविचारो मन्त्रः, तेषु च, गुह्येषु च-परस्त्रीगमनादि रूप निकृष्टगृहच्छिद्रप्रतीकारचिन्तनाथम् एकान्तविचारो गुह्यम् तेषु च। रहस्येषु-भ्रूणहत्यादि रूप निकृष्टतमगृहच्छिद्रप्रतीकारचिन्तार्थमेकान्त विचारो रहस्यं तेषु च, व्यवहारेषु वान्धवादि समाचरितलोकविदादि क्रिया प्रायः श्चित्वादि विषयरूपेषु निश्चयेषु- पूर्णनिर्णयेषु च, आपृच्छनीय:-प्रष्टव्या, पति पृच्छनीयः-चार वार प्रष्टव्यः, किमिति यतोऽसौ 'मेधी' इति खलपूमध्यवत्तिनी स्थूणा यत्र गोपंक्तिर्धान्यं गायति-मर्दयति तद्वद् यमालम्ब्य सकलनैगममण्डलं ववहारे य, आपुच्छणिज्जे पडिपुच्छणिज्जे सयस वि कुडुबरस मेढीपमाणं, आहारो, आलंपणं चक्खुमेढीभूए पमाणभूए, आलंषणभूए. चक्खुभूए, सब्धकज्जवडावए यावि होत्था' कि यह कार्ति कसेठ मंत्रोंमें-देशहित के लिये या राज्यादिहित के लिये किये निश्चित विचारों में-गुह्यों में-परस्त्रिगमनादिरूप निकृष्ट गृहछिद्रों को प्रतीकार करने के, लिये किये गये निश्चित विचारों में, रहस्यों में भ्रूणहत्यादिरूप निकृष्टतम गृहच्छिद्रों को दूर करने के लिये किये गये निश्चित विचारों में, व्यवहार.. में-बान्धवादिजनों को उनके द्वारा समाचरित लोक विरुद्ध क्रियाओं, की प्रायश्चित्तादिरूप शुद्धि में, और निश्चयों में पूर्ण निर्णयों में पूछा, जाता था। क्योंकि यह उनमें मेधी था। खलिहान के बीच में एक खम्भा जो गाढा जाता है उसका नाम मेधी है जैसे इस मेधी में निच्छएसु य वबहारेसु य आपुच्छणिज्जे पडिपुच्छणिज्जे सहस्से वि फुटुंबस्स, मेढीपमाण, आहारो, आलवणं चक्खूमेंढीभूए, पमाणभूए, आलंवणभूए, चक्खू. भूए, सव्वकज्जवडूढावए याविहोत्था" मा ति भाभी-इश अने રાજ્યના હિત માટે કરેલા નિશ્ચિત વિચારમાં ગુહ્યોમાં–પરસ્ત્રી ગમન વિગેરે હલકા પ્રકારના ગૃહછિદ્રોના નિવારણ કરવા માટે કરેલા નિશ્ચિત વિચારમાં “રહમાં-બ લકત્યા વિગેરે રૂપ અત્યંત હલકા પ્રકારના ગૃહછિદ્રોને દૂર કરવા માટે કરેલા નિશ્ચિત વિચારામાં, વ્યવહારમાં એટલે કે બાંધવ (ભા) વિગેરેની તેઓ દ્વારા આચરેલા લેક વિરૂદ્ધ ફિયાઓના પ્રાયશ્ચિત્ત વિગેરે શદ્ધિમાં અને નિશ્ચયેમાં પૂર્ણ નિર્ણયોમાં પૂછતે હતે કેમકે તે તેઓમાં મેધી હતે. ખળામાં એક થાંભલે ખેડવામાં આવે છે તેનું નામ મેધી છે. આ મેધીમાં, અનાજ મસળવા માટે બળ બંધાય છે, બળદે તે મેઘીની સહાયતાથી અનાજ

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