Book Title: Arhat Vachan 2002 04
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 57
________________ 1988 1988 1988 1988 1988 1988 1989 1990 1990 1994 1994 1995 1995 1999 2000 2000 2001 2001 2001 1985, 86 'आचार्य कुन्दकुन्द 1(1), q. 47-52 Jain Education International के साहित्य में विद्यमान गणितीय तत्व', अर्हत् वचन ( इन्दौर ), 'माधवचन्द्र एवं उनकी षट्त्रिंशिका', अर्हत् वचन (इन्दौर), 1(1), पृ. 65-74 'जैन गणित की मौलिकतायें एवं भावी शोध दिशाएं, (विशेष सम्पादकीय), अर्हत् वचन (इन्दौर), 1 (1), पृ. 113 - 121 'दार्शनिक गणितज्ञ - आचार्य यतिवृषभ', अर्हत् वचन ( इन्दौर), 1(2), पृ. 17 - 24 'दार्शनिक गणितज्ञ - आचार्य वीरसेन', अर्हत् वचन ( इन्दौर ), 1 ( 2 ), पृ. 25-37 'तेजसिंह एवं इष्टांक पंचविशंतिका', अर्हत् वचन ( इन्दौर), 1 (2), पृ. 68 'दार्शनिक गणितज्ञ आचार्य यतिवृषभ की कुछ गणितीय निरूपणायें, पंडित जगमोहन लाल शास्त्री साधुवाद ग्रन्थ, रींवा, पृ. 310-313 'वचन कोश के गणितीय अंश', अर्हत् वचन ( इन्दौर), 2 (2), पृ. 71-74. 'गणित के विकास में जैनाचार्यों का योगदान', Ph.D. शोध प्रबन्ध मेरठ वि. वि., मेरठ, पृ. 450 'भगवान ऋषभदेव की परम्परा में विकसित गणित', अर्हत् वचन ( इन्दौर), 6(2), q. 125-130 'जैन गणित - एक पूर्वेक्षण', जैन विज्ञान विचार संगोष्ठी, आख्या, गुना, पृ. 43 44 'जैन साहित्य एवं गणित' ज्योतिर्मय जैन अनुशीलन परिषद, जयपुर की स्मारिका, पृ. 40-42 'कन्नड़ भाषी प्रमुख जैन गणितज्ञ' Sixth World Jain Conference, New Delhi, 24-26, Dec. Souvenir (Aspects of Jaina Philosophy and Culture). 'प्राकृत भाषा में निबद्ध गणितीय ग्रन्थ, तुलसी प्रज्ञा (जैन विश्व भारती संस्थान, लाड़ का मुख पत्र ), 26 (106), पृ. 35-43 डॉ. हीरालाल जैन की श्रुत सेवा ( जैन गणित के विशेष सन्दर्भ में) ', अनेकान्त दर्पण (बीना), 2 (2000), पृ. 25-28 'जैन आगमों में गणित', जैन भारती (गंगाशहर), 48 (9), पृ. 14-21 'विश्व क्षितिज पर जैन गणित', हरखचन्द नाहटा स्मृति ग्रन्थ (दिल्ली), पृ. 558-564 'जैन गणित ' नमोस्तु आचार्य सुमतिसागर स्मृति ग्रन्थ, इन्दौर, पृ. 197 - 203 'भगवान ऋषभदेव की परम्परा में गणित', ऋषभ देशना ( ऋषभदेव जैन शोधपीठ डॉ. राममनोहर लोहिया अवध वि.वि., फैजाबाद की शोध पत्रिका), 1 (1), पृ. 74-85 - 11. जैन, अनुपम एवं अग्रवाल, सुरेशचन्द्र 1985 - - 'महावीराचार्य - एक समीक्षात्मक अध्ययन', दि. जैन त्रिलोक शोध संस्थान, हस्तिनापुर मेरठ, पृ. 84 + 12. 'जैन गणितीय साहित्य, तुलसी प्रज्ञा (लाडनूं), 11 (3), 3-16, 12 (2), पृ. 36-46, पुनर्मुद्रित (1988), अर्हत् वचन, 1 ( 1 ), पृ. 19-40. 1986, 87 जैन आगमों में निहित गणितीय अध्ययन के विषय, तुलसी प्रज्ञा (लाडनूं), 12 (4), पृ. 57 65, 13 (1), 37-43, पुनर्मुद्रित (1988), लाला हरजसराय अभिनन्दन अर्हत् वचन, 14 (2-3), 2002 For Private & Personal Use Only 55 www.jainelibrary.org

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