Book Title: Anusandhan 2017 11 SrNo 73
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 9
________________ सप्टेम्बर - २०१७ तुढेहिं मिहुणगेहिं कयजम्ममहूसवो सह सुरेहिं । इय बीयं कल्लाणयं पढम जिणिदस्स सम(म्म)त्तं ॥१८॥ कयजम्माईमहिमा देवा नंदीसरंमि गंतूणं । सासयजिणाण पूयं नर्से गीयं च कुव्वंति ॥१९॥ सुर-मिहुणगपरियरिउ कमेण संवद्धिओ तियसनाहो । सारय-ससि व्व भगवं पयडंतो देहकंतीए ॥२०॥ सुरवइ-आणाए सुरो जगप्पहाणस्स दिव्वनाहाणं । देवकुमारा हिट्ठा निवेइयं उसभसामिस्स ॥२१॥ (?) अह जोव्वर्णमि पत्ते सुरिंदमहिए जिणम्मि सुरनाहो । आगम्म विभइए विवाहकिच्चं कुणइ सव्वं ॥२२॥ सह देवेहिं परिगओ वंदित्ता तिहुयणच्चियं उसहं । पुच्छंति मिहुणयाणं भयवं परिकहइ कहणिज्जं ॥२३॥ रायाभिसेयकालो पुणरवि आगम(म्म) भत्तिराएण । सीहासणम्मि पवरे अहिसिंचइ कणयकलसेहिं ॥२४॥ सुगंधोदग-देवंग-वत्थ-आभरण-दि[व्व]मउडाइं । हरियंदण-गंधुक्कड-विलेवियं कुणइ जु(ज)यनाहं ॥२५॥ वरसुरहिमल्ल-सुरतरु-सुगंध-कुसुमच्चेयं(कुसुमोच्चयं) तियसनाहं । पवरपलंबियमालं गंधेणाऽऽसन्नभमरउलं ॥२६॥ पउमिणिपुडेहिं तोयं आणेउं मिहुणगेहिं दट्टणं । पयपंकयंमि खित्तं तुट्ठो सक्को य सुरराया ॥२७॥ कंचण-विणीयनयरि तेसिं काऊण पत्तसुरलोओ । उग्गा भोगा राइन्न खत्तिया [य] आणा पडिच्छंति ॥२८॥ सा(स)त्तीए पालियजणो संगहियतुरंग-हत्थि-गोरयणो । बहु-नगर-गाम-पट्टण-दंसियकमनायआयारो ॥२८(२९)॥ पढमरायाहिराया निप्पडिवक्खो अणंतविरिओ य । सयपुत्तनमियचलणो नरनाहसहस्सपणिवइओ ॥३०॥ परिदंसियसिप्पकलो पमुइयनिच्चूसवो व्व लोगम्मि । वित्थरियदाणविंदाण रयणरयणायरो जयइ ॥३१॥

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