Book Title: Anusandhan 2017 11 SrNo 73
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

View full book text
Previous | Next

Page 50
________________ ४४ हट्टश्रेणि सोहइ तिहां, चउरासी पोसाल, जिनप्रासाद तिहां भला, सुंदर पो ( पौ) षधसा (शा) ल. ६६ राज्य करइ तिहां राजि (जी) ओ, न्यायवंत भूपाल, जस प्रताप जगि दीपतो, सयल ज (जी) व - दयाल. ६७ अनुसन्धान- ७३ चमासु हीरजी रहा, गहगया श्रावक-लोक, हरखी वित क ( ख ) रचि (चइ) घणुं, आपणुं आणि (इ) अशोक. ६८ संघ - मुख्य तिहां जाणीइ, श्रावक सा. लखराज, नरभव पामी दोहिलुं, करइ ति (ते) धर्मना काज. ६९ अवसर लही य स (सु) गुरु तणो, अति घणुं आणी भाव, बिंब प्रतिष्ठा कराविइ, भवसायर भवनाव. ७० इम करीय विचार उपास्यरइ, आव्या सा. लखराज, वंदी चरण-कमल कहइ, मुहुरत जु (जू) ओ गुरुराज. ७१ श्रीहीरविजयसूरि सुंदर, मुहुरत करीय विचार, वैशाख सुदि दिन बारसि, तुमे करु ते निरधार. ७२ इम सुणी सा. लखराजनइ, मनि थयुं हरख अपार, संघ तेडी ठाम ठामना, भक्ति करि ( रइ ) सुविचार. ७३ साधु श्रावकनइ पोषीइ, घोषीइ जीव अमारि, रथयात्रादिक मोत्सव, उत्सव घर- घरि (र) बारि. ७४ वार्जित्र वाजई अति भलां, पंच शब्द निसाण, मर्द(द्द)न(ल) ताल नफेरी भेरी, बीजा नाद सुमांन. ७५ दान दिये तिहां नव नवा, याचकनइ बहुमांन, कणय कभाय वांछोडा, घोडा फोफल पान. ७६ इम करता तिहां आवि (वी) ओ, संवत सोलबावन (न्न) (१६५२), वैशाख सुदि दिन बारसि, प्रतिष्ठा दिन धन (न्न). ७७ शुभवेला गुरु हीरजी, बइठा वेदिकामांहि, विधिसुं प्रतिमानइ करइ, अंजनसि (शि) लाका त्यांह. ७८ इण इ (अ) वसरि संघ दीवनो, वीनती (ति) करइ कर जोडि (ड), उवज्झाय पद दीओ मुनिविजय, जगगुरु अम्ह ए कोड. ७९

Loading...

Page Navigation
1 ... 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86