Book Title: Anusandhan 2017 11 SrNo 73
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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सप्टेम्बर - २०१७
गुरुमुख चंद निहालिनई रे.
मोह्या चतुर चकोर... सु. वादी वदन विकल थयां रे,
जे जिनशासन चोर... (७) सु. मुखि सिद्धांत वांणी वदइ रे
सुणि सवि जन मन रंग... सु. प्रभु समता मंत्रइ करीरे
ढलीया ढूंढ लुछंग... (८) सु. ईणि परि सकल गुणे करी रे
सभा सुहावइ सांमि... सु. पंडित हंसविजय तणोरे
तिलक नमई सिर नांमि... (९) सु. इति श्रीविजयप्रभसूरी स्वाध्यायः ॥छ।।
श्रीनेमिजिन स्तवन राजुल रमणी रंगस्युं रे,
जाय करई कर जोडि रे, सुणि सांमि. एकवार मुझ एकवी रे,
केलि करो मन कोडि रे... (१) रस भरीया आस पूरो रे, ओ आंकणी
___हठस्युं म करो होडि रे... सु. योवन वय छई जागतूं रे
छटकिं छयलम छोडि रे,... रस... (२) लघु वय ते लाखइ लद्यु रे, .
अहनो अरथ एकांत रे... सु. जिम तिम नांख्युं न जाइस्यइ रे ।
कांम विना एकांत रे... रस... (३)
काल र... सु.

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