Book Title: Anusandhan 2017 11 SrNo 73
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
View full book text
________________
सप्टेम्बर - २०१७
३९
श्रीमुनिविजयजी उपाध्यायनो रास वाचकचक्रचूडामणि-महोपाध्याय-श्रीमुनिविजयगणिगुरुभ्यो नमः ।
॥ राग-देशाख ॥ दुआ(दूहा) वंछितदायक सुरतरु, श्रीआदि जिणेसर द(दे)व, मरुदेवी-उअरि धर(री)ओ, सुर नर कर(रे) जस सेव. १ शांतिकरण श्रीशांति जिण, सुख-संपतिदातार, संयमकमला अणुसरी, पाम्यु भवनु पार. २ यदुकुलकमलदिवाकरू(रु), नेमिनाथ भगवंत, राज राजि(जी)मति परहरी, कीधु भवनु अंत. ३ कमठ-मांन जेणि मोडीओ, पन्नग कीउ धरणिंद, जस प्रताप जगि दीपतो, पार्श्वनाथ जिनचंद. ४ भविक जीवनइ तारवा, कलियुग कओ अवतार, वीर जिणेसर वंदीइ, जस गोयम गणधार. ५ कविजन जन-हितकारणी, दुर्मति वारइ जेह, वीणा-पुस्तक-धार(रि)णी, समरूं सर[स]ति तेह. ६ पंचम-गति-सुखदायकु, प्रणमी पंच जिणंद, वली समरूं चित(त्त) सरसति, जस सेवइ सुरवृंद. ७ तपगच्छ(च्छि) महिमा जेहनु, सेवइ सुर नर कोडि, श्रीमुनिविजय उवझायनु, रास रचुं कर जोडि. ८
॥ ढाल ॥ मही(हि)मंडलमांहिं अभिराम, जंबूदीप सेहि सुखधाम, दक्षिण भरत तिहां अति सोहइ, गुज्जर देस दीठइ मन मोहइ. ९ वीसलनगर तिहां अति चंग, गढ मढ मंदी(दि)र पोलि उत्तंग, वाडी वावि सरोवर कूप, राज करि(रइ) तिहां न्याइ भूप. १० चउरासी चहुटा सुविशाल, धर्मवंत तिहां बाल गोपाल, सोहइ सुंदर जिनप्रासाद, देवलोक सम मांडइ वाद. ११ व्यवहारी निवसइ धन-पूरा, दान गुणे करी दीसइ सूरा, तिहां मुख्य सा. केसव कहीइ, सी(शी)ल गुणे जगि जस लहीइ. १२

Page Navigation
1 ... 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86