Book Title: Agam Sutra Satik 13 Rajprashniya UpangSutra 02
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 103
________________ ર૮૮ राजप्रश्नीयउपाङ्गसूत्रम्-३६ जोयणाई बाहल्लेणं सब्वमणिमईओ अच्छाओ व पडिलवातो। तेसिणं मणिपेढियाणं उवरि चत्तारि जिनडिमातो जिणुस्सेहपमाणमेत्ताओ संपलियंकनिसन्त्राओ थूमाभिमुहीओ सन्निखित्ताओ चिटुंति, तंजहा-उसभा १ वद्धमाणा २ चंदानना ३ वारिसेना ४/ तेसिणं थूभाणं पुरतो पत्तेयं २ मणिपेढियातो पन्नत्ताओ, ताओ णं मणिपेढियातो सोलस जोयणाई आयामविखंभेणं अट्ठ जोयणाई बाहल्लेणं सव्वमणिमईओ जाव पडिरूवातो, तासि णमणिपेढियाणं उवरि पत्तेयं २ चेइयरुक्खे पन्नत्ते, तेणंचेइयरुक्खाअट्ठजोयणाइंउद्धं उच्चत्तेणं अट्ठ जोयणाई उव्वेहणं दो जोयणाई खंधा अद्धजोयणं विक्खंभेणं छजोयणाई विडिमा बहुमज्झदेसबाए अट्ट जोयणाई आयामविक्खंभेणं साइरेगाइं अट्ठ जोयणाइं सव्वग्गेणं पन्नता तेसि णं चेइयरुक्खाणं इमेयारूचे वण्णावासे पन्नत्ते, तंजहा-वयरामया मूला रययसुपइडिया सुविडिमा रिट्टामयविउला कंदा वेरुलिया रुइला खंधा सुजायवरजायस्वपढमगा विसालसाला नानामणिमयरयणविविहसाहप्पसाहवेरुलियपत्ततवणिज्जपत्तबिंटा जंबूणयरत्तमउयसुकुमालपवालसभिया वरंकुरग्गसिहरा विचित्तमणिरयणसुरभिकुसुमफलभरेणनमियसाला अहियं मननयननिव्वुइकरा अमरयरसरससमरसफला सच्छाया सप्पभा सससिरीया सउज्जोया पासाईया ४। तेसि णं चेइयरुक्खाणं उवरिं अट्ठमंगलगा झया छत्ताइछत्ता, तेसि णं चेइयरुक्खाणं पुरतोपत्तेयं २ मणिपेढियाओ पन्नताओ, ताओणमणिपेढियाओअट्ठजोयणाईआयामविक्खंभेणं चत्तारि जोयणाई बाहल्लेणं सबमणिमईओ अच्छाओ जाव पडिरूवाओ। तासिणं मणिपेढियआणं उवरि पत्तेयं २ महिंदज्झया पन्नत्ता, ते णं महिंदल्झया सद्धिं जोयणाई उडं उच्चत्तेणं जोयणं उब्वेहेणं जोयणं विखंभेणं वइरामया बद्दलहसुसिलिट्ठपरिघट्टमट्ठसुपतिहियाविसिट्ठा अनेगवरपंचवण्णकुडभिसहस्सपरिमंडियाभिरामा वाउडयविजयकेजयंतीपडागाछत्ताइच्छत्तकलियातुंगा गयनतलमभिलंघमाणसिहरापासादीया४, अट्ठमंगलगा झया छत्तातिछत्ता। तेसिणंमहिदज्झयाणंपुरतो पत्तेयंर नंदापुक्खरिणीओपन्नताओ, ताओणंयुक्खरिणीओ एगंजोयणसयंआयामेणं पन्नासंजोयणाइविक्खंभेणं दसजोयणाई उव्वेहेणं उव्वेहेणं अच्छाओ जाव वण्णओ एगइयाओ उदगरसेणं पन्नताओ, तत्ये २ पउमवरवेइयापरिखित्ताओ पत्तेयं २ वनसंडपरिखित्ताओ, तासि णं नंदाणं पुस्खरिणीणं तिदिसिं तिसोवाणपडिरूवगा पन्नत्ता, तिसोवाणपिरूवगाणं वण्णओ, तोरणा झया छत्तातिछत्ता। सभाएणंसुहम्माए अडयालीसंमनोगुलियासाहस्सीओपन्नत्ताओ, तंजहा-पुरछिमेणं सोलससाहस्सीओ पञ्चच्छिमेणं सोलससाहस्सीओ दाहिणेणं अट्ठसाहस्सीओ उत्तरेणं अट्ठसाहस्सीओ, तासु णं मनोगुलियासु बहवे सुवण्णरूप्पमया फलगा पन्नत्ता, तेसु णं सुवन्नरुप्पमएसु फलगेसु बहवे वइरामया नागदंता पन्नता, तेसु णं वइरामएसु नागदंतएसु किण्हसुत्तवद्दवग्यरियमल्लदामकलावा चिट्ठति। सभाए णं सुहम्माणे अडयालीसं गोमाणसियासाहस्सीओ पन्नत्ताओ, जह मनोगुलिया For Private & Personal Use Only Jain Education International www.jainelibrary.org

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