Book Title: Adhar Dushan Nivarak
Author(s): Anopchand Malukchand Sheth
Publisher: Anopchand Malukchand Sheth

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Page 10
________________ ( 2 ) जावा विगेरेनी शक्ति उत्पन्न बाय बे, माटे तेनुं शुं समजवुं ? न. पांच नूतमां एवी पृथक् पृथक् शक्ति नथीज, तो पी एका वाथ केवी रीते थाय; कदापि उत्पन्न थवानो स्वभाव माने तो बधा जीवनी सरखी शक्ति होवी जोइए, ते देखाती नथी; ज्ञानशक्ति सर्वनी भिन्न भिन्न देखाय बे, ते न होवी जोइए. सुख दुःख पण जिन्न जिन्न जोवामां आवे बे, ते होवुंन जोइए; ने ज्यारे भिन्न भिन्न देखाय बे त्यारे तेनुं कांइ पण कारण होवुं जोइए. प्र. ए. जे ज्ञानशक्ति नवी वधती जोवामां आवे छे. तेतो नद्यमनी खामीश्री जोवामां आवे छे, जे ज्ञाननो उद्यम करे तेने ज्ञान थाय, जे नद्यम न करे तेने ते न थाय. D. वे मास साधे बेशी एकी वखत नद्यम करे बे, सरखो वखत महेनत करे बे, पण सरखुं जणी शकता नथी. केटलाएक ज े तो अर्थ समजी शकता नथी, केटलाएक समजीनेप्रमाणे वर्ती के बे; तेम बीजो माणस वर्ती शकतो नथी. माटे एकला नद्यमश्री ज्ञान श्रावस्तुं नथी. प्र. ६. उद्यम सिवाय ज्ञान बीजा शाश्री श्रावे . D. ज्ञानशक्ति जीवनी वे, ते अवराई गई वे, तेमांधी जेटलां जेटलां प्रावरण खुले बे, ते प्रमाणे ते माणसने ज्ञान थाय बे. प्र. ७. त्यारे शुं नद्यमनी जरुर नथी ? एकली श्रात्मशक्ति श्रीज ज्ञान थाय वे, ने दिताहित जाणे वे ? B. ज्यांसुधी ग्रात्मानी जेटली शक्ति बे, ते प्रगट नथी थई त्यां सुधी श्रात्मा अने शरीर ए बन्नेना मलवाथी ज्ञान थाय वे. श्रात्मानुं ज्ञान अने श्रात्मानी शक्ति कर्मना जोगथ । श्रवराई गई बे. ते श्रवराएली ने त्यांसुधी इंडियोना संजोगश्री ज्ञान थाय बे. जेमके श्रांखे आपले जोईए बीए, ते श्रांखो घामी होय, श्रने जीव नीकली गयो, तो ते प्रांखोथी कंद जगातुं नथी. जीव श

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