Book Title: Vastu Chintamani
Author(s): Devnandi Maharaj, Narendrakumar Badjatya
Publisher: Pragnyashraman Digambar Jain Sanskruti Nyas Nagpur
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वास्तु चिन्तामणि
आयु गणना
आयु निर्धारण करने के लिए प्राचीन शास्त्रों में अनेक विधियों का उल्लेख किया गया है
1. मिट्टी की वास्तु की आयु निकालने के लिए वास्तु का क्षेत्रफल अंगुल में निकालकर उसको 8 से गुणा कर पश्चात 60 से विभाजित करना चाहिये। भाग देने पर जितना शेष बचे वडी वास्तु की आयु समझें । उदाहरण- वास्तु की लम्बाई 5 हाथ 5 अंगुल हैं तथा
वास्तु की चौड़ाई 5 हाथ 5 अंगुल है । लम्बाई × चौड़ाई = क्षेत्रफल
5 हाथ 5 अंगुल लंबाई x 5 हाथ 5 अंगुल चौड़ाई 125 अंगुल x 125 अंगुल = 15625 वर्गांगुल आकलित उदाहरण में क्षेत्रफल 15625 है। इसमें 8 का गुणा करें,
15625 x 8 = 125000 गुणनफल
गुणनफल में 60 का भाग देवें,
125000 + 60 = 2083 लब्ध आया तथा शेष 20 रहा ।
20 वास्तु की आयु है अर्थात् 20 वर्ष आयु मर्यादा
2. मिट्टी की वास्तु की आयु का 10 गुना चूने की वास्तु की आयु होती है। अर्थात् उपरोक्त प्रकरण में 200 वर्ष आयु मर्यादा होगी।
3. मिट्टी की वास्तु की आयु का 30 गुना चूने पत्थर से बनी वास्तु की आयु है। उपरोक्त प्रकरण में 600 वर्ष आयु मर्यादा होगी।
4. मिट्टी की वास्तु की आयु का 90 गुना सीसे और पत्थर से बने वास्तु की आयु है। उपरोक्त प्रकरण में 1800 वर्ष होगी।
5. धातु से बनाये गये गृह की आयु मिट्टी की वास्तु की आयु का 370 गुना करने पर मिलती है। उपरोक्त प्रकरण में 7400 वर्ष आयु होगी । वर्तमान काल में लोहा, सीमेंट से कांक्रीट के भवनादि निर्माण होते हैं। चूने के मकान की आयु के बराबर ही इसकी आयु जानना चाहिए।