Book Title: Nandanvan Kalpataru 2009 00 SrNo 22
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti

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Page 61
________________ THTTmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm 1: 2 कलिंग जीत्यो पण मानवता वधेरी कर्ता-अज्ञातः lrel मे देशनी दोलत वेडफीने हण्या युवानो नवराष्ट्रसर्जको, रची अशांति, प्रगति य रोधी शी युद्ध अंते वरसिद्धि साधी ? कलिंग जीत्यो पण जीततां तो में प्राण-शी मानवता वधेरी, जीत्या नहि आत्मरिपु महाबला आ स्थूल जीते वसी सूक्ष्म हार। Mainamainamusamalsina कलिङ्गो विजितोऽपि मानवता हता अनु. मुनिधर्मकीर्तिविजयः देशस्य सम्पत्तु मया विनाश्य हता युवानो नवराष्ट्रमूलाः । क्लेशः कृतो हि प्रगतिश्च रुद्धा । का श्रेष्ठसिद्धिस्तुमुलेन सिद्धा ? ॥ जितः कलिङ्गो जयताऽपि हन्त ! मनुष्यता प्राणसमा विशस्ता । नाऽन्तर्विपक्षा विजिता मयाऽहो ! अस्मिन् जये सूक्ष्मपराजयोऽस्ति ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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