Book Title: Bhavishyadutta Charitram
Author(s): Meghvijay Gani, Mafatlal Zaverchand Gandhi
Publisher: Mafatlal Zaverchand Gandhi
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________________ गविण्यदत्तचरित्रम् 118 पञ्चदशमोऽ विकारः स्वामिन्नामितदुर्जेय-विपक्षशितिनायक ! / प्रसादजनकं कार्य, साम्पतं तन्निवेदय // 21 // अयं हि पोतनाधीशसूनुनूनं महाभुजः / त्वत्तेजसाऽअसा बन्दी-कृतः सुकृतवैभवात् // 22 // परिवारोऽस्य सर्वोऽपि. कारागारेऽस्ति सम्पति / क्षुद्राशया भ्रमन्येते, सामन्ताः परितो वने // 23 // तदयं मुच्यतेऽकस्मात्युनयुद्धाय जायते / सज्जो निर्लज्जदौर्जन्य-जन्यतापात्स पापधीः॥ 24 // अथ बद्धः कियत्कालं, रक्ष्यते लक्ष्यते न तत् / चिन्तयन्ति बहूपायान्मोचनायाऽस्य पाक्षिकाः // 25 // हन्यते च यशोहानिहीं हा निष्कारणवैरिणा / किं कृतं पोतनेशेन, सुतः कटे निपातितः // 26 // इति प्रज्ञापितो भूपः, कमलासूनुनाऽभुना / तुभ्यं यद्रोचते सभ्यं, तत्कुरुष्वेति तं जगौ // 27 // सज्जीकारयित्वा सैन्यं, भविष्येण चरद्वयं / अमोचि पोतनपुरवृत्तान्तं ज्ञातुमिच्छया // 28 // स्वयं सन्नह्य सामन्तैः, समं यन्त्रालये स्थितः / धावद्भिरः सुभटैः, पुरमासीच्चलाचलम् // 29 // क्रूरकर्मकृतो लोकान्निदर्यान् जीवमारणे / आहूय स्थापयामास, कारागारान्तिके नृपः // 30 // व्यचिन्ति युवराजेन, सैनिकानां गतागतैः / अद्याऽहं हन्त इन्तव्यः, शत्रु गा पशुवन्ननु / / 31 // तत् बन्दिरक्षाऽध्यक्षेण, व्याचचक्षे मुहुर्महुः / शूरस्य शरणं कोण, हा भविष्यति सम्पति // 32 // निरायुधोऽयं न वध्यः, सायुधः केन हन्यते / निबन्धकाले मरण, हा! शुर : तव विस्मृतम् // 33 // कश्चिदाऽऽहाऽऽत्मदाहाय, मारितेनाऽमुनाऽथ किम् / यद्वा वणिक्तनुजस्य, किं बघायोद्यतः करः // 34 // BREAKXXXXX

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