Book Title: 20 Vi Shatabdi Ke Jain Manishiyo Ka Yogdan
Author(s): Narendrasinh Rajput
Publisher: Gyansagar Vagarth Vimarsh Kendra Byavar
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83.
88.
79. जिनोपदेश, पद्य 41, पृष्ठ 14 80. जिनोपदेश, पद्य 68, पृष्ठ 23 । 81. पद्मप्रभस्तवनम् - स्व. नाथूराम जी की स्मृति में प्रकाशित, चावण्ड (जि. उदयपुर)
राजस्थान, वी. नि. सं. - 2509 82. पद्मप्रभस्तवनम्, पद्य 2, पृष्ठ 3
विस्तार के लिए द्रष्टव्य - महापुराण (उत्तरपुराण), गुणभद्राचार्यकृत, प्रकाशक-भारतीय
ज्ञानपीठ प्रकाशन, वाराणसी वि. सं. 1968, पर्व 52/41-42 84. महापराण (उत्तर पराण) पर्व 52/57 । 85. मोक्षपद में अकेले स्थिर होने से "एक" । 86. अनेकनामों एवं गुणों की उपस्थिति होने से "अनेक" । 87. आत्मा की अपेक्षा आदिरहित है अतः "अनादि" ।
हितोपदेशकों में तीर्थङ्कर (प्रथम) अग्रगव्य होने से “आदि" । 89. परमार्थतः किसी की सहायता नहीं करते- असहायका । 90. कामभात से असम्पृक्त । 91. लोकोत्तर कीर्तिवाले । 92. ज्ञानवान् होने से प्राज्ञ ।
पद्मप्रभुस्तवनम् पद्य 17 | 94. पद्मप्रभस्तवनम् पद्य 14 । 95. वर्णी अभिनन्दन ग्रन्थ - पृष्ठ 66 एवं 67 । संपादक, खुशालचन्द्र गोरावाला, प्रकाशक
श्रीवर्णी हीरक जयंती महोत्सव समिति, सागर (म.प्र.), अश्चिन 2476, वी.नि.सं. अनेकान्त मासिक पत्र के जनवरी, फरवरी सन् 1947 ई. के पृष्ठ 354 से उद्धत। मुद्रक एवं प्रकाशक- पं. परमानन्द शास्त्री, वीर सेवा मन्दिर, सरसाना, (जि. सहारनपुर) उ.प्र. श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन संस्कृत महाविद्यालय, अहार क्षेत्र संस्मरण-अङ्क
प्रकाशक-मन्त्री, अहार क्षेत्र एवं विद्यालय, 1971 के पृष्ठ 1-2. । 98. श्री अहारतीर्थस्तवनम्, पद्य सं. 7 99. विद्वत् अभिनन्दन ग्रन्थ : वही, पृष्ठ 296 । 100. श्री गणेशप्रसाद वर्णी स्मृति ग्रंथ : पृष्ठ 145-147 101. पपौरा पूजन एवं पपौराष्टक पुस्तक के पृष्ठ 16-17 से संकलित, लेखक-शर्मनलाल
"सरस" सकरार, झांसी, प्रकाशक-सि. रतनचन्द्र चंदैरा, मन्त्री, श्री दिगम्बर जैन
अतिशय क्षेत्र पपौरा जी (टीकमगढ़) द्वितीय संस्करण, सन् 1981 । 102. काव्य प्रकाश: 9/85 103. वर्णी अभिनन्दन ग्रन्थ - सम्पादक-खुशालचन्द्र गोरावाला, सिद्धान्तशास्त्री, प्रकाशक
श्री वर्णी हीरक जयन्ती महोत्सव समिति, सागर, पृष्ठ-68 104. गोम्मटेस थुदि (गोम्मटेश अष्टक), प्रकाशक - श्री भागचंद्र इटोरया सार्वजनिक न्यास,
दमोह सन् 1989 ई. वीर-वाणी-पाक्षिक पत्रिका, 18 जुलाई 1985 ई. के मुख पृष्ठ पर । प्रकाशक पं.
भवरलाल जैन, श्री वीर प्रेस जयपुर - 3 106. आचार्य विद्यासागर स्तवनम् - प्रत्येक पद्य की अन्तिम पङ्क्ति । 107. विद्वत् अभिनन्दन ग्रन्थ : वही,पृष्ठ 240 । 108. विद्वत् अभिनन्दन ग्रन्थ : वही पृष्ठ 331 - 332 ।