Book Title: 20 Vi Shatabdi Ke Jain Manishiyo Ka Yogdan
Author(s): Narendrasinh Rajput
Publisher: Gyansagar Vagarth Vimarsh Kendra Byavar

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Page 291
________________ 40. -- - -27037. सुदर्शनोंदये 2/12/ श्रीसमुद्रदत्त चरित्र - 6/17/18 जंयोदय का अष्टम एवं सुदर्शनोदय का प्रथम सर्ग द्रष्टव्य है । वीरोदयं 2/36. छन्दोमञ्जरी 2/21-25 सम्यक्त्वसारं शतकंम् 94 पद्य (अं) वीरोदय 8/5 (ब) जंयोदय, 3/57 (स) सुदर्शनोदय 4/37 (द) दयोदयचम्पू 1/18 44. छन्दोमञ्जरी 3/6/142 जयोदय 10/9 46. श्री समुद्रंदत्तं चरित्र 6/26 47. . वृत्तरत्नाकर 3/38, केदार भट्ट, प्रकाशन - मोतीलाल बनारसी दास, वाराणसी, द्वितीय संस्करण, सन् 1966 । 48. जयोदय 2/1 से 100 तथा 113, 119, 120, 122, 124, 126 तथा 129 49. . वहीं 7/55 से 104 तकं 50. वही 21/1 से 66 तक 51. वहीं 2/23/70 52. वृत्तरत्नाकार 2/32 53. वीरोदयं 14/1 से 82 तक 54. जंयोदयं 22/1 से 82, 88, 81 वीरोदय 1/39 जयोदय 22/25 . 57. छन्दोमञ्जरी 2/10/53 जयोदय 25/1 से 86 जयोदय 9/1 से 86 तक समुद्रदत्त चरित्रं 7/1 से 30 तक श्री समुद्रदत्त चरित्रं 7/11/79 62. (अं) श्रुतबोध 4 (ब) छन्दो मंजरी 5/1-2/151-152 जयोदय 6/1, 3 से 131 तक 64. वीरोदय 4/34-36, 38-56 65. वीरोदय 4/44/72 66. छन्दोमञ्जरी 2/2/48 67. श्री समुद्रदत्तचरित्र 8/1/66 68. छन्दोमञ्जरी 2/2/72 69. जयोदय, 18/1-86 70. वीरोदय 21/1-27 71. छन्दोमञ्जरी 3/12/145 से 118 .. . -

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