Book Title: 20 Vi Shatabdi Ke Jain Manishiyo Ka Yogdan
Author(s): Narendrasinh Rajput
Publisher: Gyansagar Vagarth Vimarsh Kendra Byavar
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172. वही 17/142 173. वही 18/100 174. वही 19/120 175. वही 20/19 176. वही 21/97 177. वही 22/91 178. वही 23/97 179. वही 24/148 180. वही 25/80 181. वही 26/107 182. वही 27/66 183. वही 28/71 184. वही 14/99 185. जयोदय, 2/70/9186. दयोदय, 3/4/57 187. दयोदय, 4/27/84 188. सुदर्शनोदय 7/5/124 189. साहित्य दर्पण - 9/2 का उत्तरार्द्ध एवं 3 का पूर्वार्ध । 190. - साहित्य दर्पण, 9/3 का उत्तरार्द्ध 4 के पूर्वार्ध का अर्द्धभाग । 191. साहित्य दर्पण, 9/4
जयोदय 6/103-104/316-317 193. सुदर्शनोदय, 3/41/58 . . 194. जयोदय 3/23-92 195. सुदर्शनोदय 6/3-14 196. श्रीसमुद्रदत्त चरित्र 3/2-14 197. दयोदय 2/पद्य 13 के पूर्व के गद्यभाग से 22 पद्य के बाद के गद्य भाग तक 198. दयोदय, 7/1 पद्य के बाद से 124 पृष्ठ पर 199. वीरोदय 7/10-11 200. जयोदय 11/1-36 201. वीरोदय, 6/29 एवं 4/10 202. श्रीसमुद्रदत्त चरित्र 6/3-4/61-62 203. सुदर्शनोदय, 2/5-6 तथा 2/43 204, दयोदय चम्पू 7/23 205. सम्यक्त्वसार शतकम् पद्य 28. 206. जयोदय 24/51-52 पद्य । 207. (अ) जयोदय 8/5 से 15 (ब) वीरोदय 2/46 तथा 7/31 (स) श्रीसमुद्रदत्त चरित्र
2/2/13 (द) सुदर्शनोदय 7/31 (स) श्रीसमुद्रदत्तचरित्र 2/2/13 (द) सुदर्शनोदय
7/31 पद्य | 208. श्रीसमुद्रदत्त चरित्र 3/33/34
192.
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