Book Title: Yantrarajo
Author(s): 
Publisher: 

View full book text
Previous | Next

Page 25
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir मलयेन्दुसूरिक्सटीकासहितः / अथ शानयानयनम् / सवादधश्चत्कलिकादिकां स्यादतीतभोग्यान्तरताडितं तत्। घट्या हृतं भुक्तफलेन युक्तं यन्त्र स्फुटाः क्रान्तिलवा भवन्ति // 7 // अस्य व्याख्या लवानां भुजांशानामधस्ताद्यदि कनादिक फलं भवति तदा तदतीतभीग्यान्सराङ्गताडितं षच्या भक्त भुक्तफले युक्तं च यन्ने स्फुटाः क्रान्तिलवा भवन्ति / अत्रीदाहरणम् / भुजांगाः 1.130 तत: क्रान्तिकलाकोष्ठ केषु दशांशानामधः प्राप्तं फलं कलादि 2382 तदधोऽन्तरं 23 // 4. पनेनान्तरेण पूर्वोक्ता त्रिंशगु मखते जाता: 18.120. प्रधोऽस्य पध्या भागे नाच 2. ते उपरि हिम्यन्ते जाता विकलाः 710 पामा षध्या भागे लब्धं कलाः 11 विकलाः 50 एतद्भुक्ता फले 23812 नियु क्रान्ति कला: सम्पत्राः 25.0 152 एवं मर्वत्र यदि तवानामध: कलादिकं भवति सय प्रकिया। भुजांगा: 20 तेषामधः प्राप्त कलादि 1415 एता एय नवतिभागात्मकस्य राशियस्य परमक्रान्तिकला भवन्ति / आमामेय क्रान्तिकलानां पध्या भागे लब्धा: परमकास्ययाः 23 कला: 35 एवमन्यावापि क्रान्तिसाधनं कार्यम् / For Private And Personal Use Only

Loading...

Page Navigation
1 ... 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145 146 147 148 149 150