Book Title: Chahdhala 1
Author(s): Daulatram Kasliwal
Publisher: Bharat Varshiya Anekant Vidwat Parishad

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Page 4
________________ छहढाला प्रश्न ४-मंगल का अर्थ क्या है ? उत्तर-मंग = सुख | ल = लाति । ददाति = जो सुख को देवे उसे मंगल कहते हैं । अथवा-मम् = पापं । गल = गालयतीति । जो पाप का नाश करे उसे मंगल कहते हैं। .. प्रश्न ५--पंगलाचरण क्यों किया जाता है ? उत्तर--(१) निर्विघ्न समाप्ति (२) शिष्टाचार पालन (३) नास्तिकता का परिहार (४) पुण्य की प्राप्ति इन कारणों से मंगलाचरण किया जाता है । प्रश्न ६–मंगलाचरण के लाभ बताइये ? उत्तर--कार्य के आदि में मंगल करने से--- शिष्य पारंगत होता है । मध्य में मंगल करने से प्रारंभ किया कार्य निर्विघ्न पूर्ण होता है । अन्त में मंगल करने से विद्या एवं विद्या के फल की प्राप्ति होती है | प्रश्न ७–तीन लोक कौन से हैं ? उत्तर—(१) ऊर्ध्व लोक, (२) मध्य लोक, (३) अधोलोक । प्रश्न ८–तीन लोकों में कौन जीव कहाँ रहते हैं ? उत्तर-(१) ऊर्ध्व लोक में - कल्पवासी एवं कल्पातीत देवों का तथा सिद्धों का निवास है। मध्य लोक में – मनुष्य, पशु, पक्षी आदि का निवास है । अधोलोक में –असुरकुमार, राक्षसादि भवनवासी-व्यन्तर देवों एवं नारकियों का निवास हैं तथा एकेन्द्रिय जीव सर्वत्र व्याप्त हैं। प्रश्न ९-लोक किसे कहते हैं ? उत्तर—जिसमें जीवादि छहों द्रव्य पाये जाते हैं, उसे लोक या लोकाकाश कहते हैं। जीवों की चाह (चौपाई छन्द-१४ मात्रा) जे त्रिभुवन में जीव अनन्त, सुख चाहैं दुखतें भयवन्त । तातें दुखहारी सुखकार, कहैं सीख गुरु करुणा धार ।।२।।

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