Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
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जइ सि कुविओ खमाहि एगावराहं मे ।। [१३२] तुज्झ यविगयधण-विमलसिसमंडलागार-सस्सिरीयं ।
सारयनवकमल-कुमद-कुवलय-दलनिकरिस निभनयणं ।। वयणं पिवासागयाए सद्धा मे पेच्छिउंजे ।
अवलोएहिं ता इ ममं नाह जा ते पेच्छामि वयणकमलं ।। [१३३] एव सप्पणय-सरल-महराइं पुणो-पुणो कलुणाई ।
वयणाई जंपमाणी सा पावा मग्गओ समण्णेइ पावहियया ।। [१३४] तए णं से जिणरक्खिए चलमणे तेणेव भूसणरवेणं कण्णसुहमणहरेणं तेहि य सप्पणय-सरल-महर-भणिएहिं संजाय-विउण-राए रयणदीवस्स देवयाए तीसे संदरथण-जहण-वयण-करचरण-नयण-लावण्ण-रूव-जोवण्णसिरिं च दिव्वं सरभस-उवगूहियाई बिब्बोय-विलसियाणि य विहसियसकडक्खदिहि-निस्ससिय-मलिय-उवललिय-थिय-गमण-पणय-खिज्जिय-पासाइयाणि य सरमाणे रागमोहियमती अवसे कम्मवसगए अवयक्खड़ मग्गतो सविलियं ।
तए णं जिणरक्खियं सम्प्पण्णकलणभावं मच्च-गलत्थल्ल-नोल्लियमई अवयक्खंतं तहेव जक्खे 3 सेलए जाणिऊण सणियं-सणियं उव्विहइ नियगपट्टाहि वियगसद्धे तए णं सा रयणदीवदेवया निस्संसा कलुणं जिणरक्खियं सकलुसा सेलगपट्ठाहिं ओवयंतं-दास मओसि त्ति जंपमाणी अपत्तं सागरसलिलं गेण्हिय वाहाहिं आरसंतं उड्ढं उव्विहइ अंबरतले ओवयमाणं च मंडलग्गेणं पडिच्छित्ता नीलप्पल-गवलगलिय-अयसिकुसुमप्पागासेण असिवरेण खंडाखंडि करेइ करेत्ता तत्थेव विलवमाणं तस्स य सरस-वहियस्स घेत्तूणं अंगमंगाई सरुहिराई उक्खित्तबलिं चउद्दिसिं करेइ सा पंजली पहिट्ठा ।
[१३५] एवामेव समणाउसो! जो अम्हं निग्गंथो वा निग्गंथी वा आयरिय-उवज्झायाणं अंतिए पव्वइए समाणे पुनरवि माणुस्सए कामभोगे आसायइ पत्थइ पीहेइ अभिलसइ से णं इहभवे चेव बहणं समणाणं बहूणं समणीणं बहूणं सावयाणं बहूणं सावियाण य हीलणिज्जे जाव संसारकंतारं भुज्जो-भुज्जो अनपरियट्टिस्सइ जहा व से जिणरक्खिए ।
[१३६] छल्लिओ अवयक्खंतो निरवयक्खो गओ अविग्धेणं ।
तम्हा पवयणसारे निरावयखेणं भवियव्वं ।। [१३७] भोगे अवयक्खंता पडंति संसारसागरे धोरे ।
भोगेहिं निरवयक्खा तरंति संसारकंतारं ॥ [१३८] तए णं सा रयणदीवदेवया जेणेव जिणपालिए तेणेव उवागच्छइ बहहिं अनुलोमेहि य पडिलोमेहि य खरएहि य मउएहि य सिंगारेहि कलणेहि य उवसग्गेहि जाहे नो संचाएइ चालित्तए वा खोभित्तए वा विपरिणामित्तए वा ताहे संता तंता परिता निविण्णा समाणा जामेव दिसिं पाउब्भूया तामेव स्यक्खंधो-१, अज्झयणं-९
दिसिं पडिगया ।
तए णं से सेलए जक्खे जिणपालिएण सद्धिं लवणसमुदं मज्झंमज्झेणं वीईवयइ वीईवइत्ता जेणेव चंपा नयरी तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता चंपाए नयरीए अग्गुज्जाणंसि जिणपालियं पिट्ठाओ
[दीपरत्नसागर संशोधितः]
[88]
[६-नायाधम्मकहाओ]
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