Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
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आवासेस् हत्थिखंधवरगया महया-महया सद्देणं जाव उग्घोसेमाणा एवं वयह- एवं खल देवाणप्पिया० कल्लं पाउप्पभायाए जाव दुवयस्स रण्णो धूयाए चुलणीए देवीए अत्तियाए घट्ठज्जुणस्स भगिणीए दोवईए रायवरकण्णाए सयंवरे भविस्सइ, तं तुब्भे णं देवाणुप्पिया! दुवयं रायाणं अनुगिण्हेमाणा ग्रहाया जाव सव्वालंकारविभूसिया हत्थिखंधवरगया सकोरेंट० सेयवरचामराहिं० हय-गय-रह० महया भड-चडगर जाव परिक्खित्ता जेणेव सयंवरामंडवे तेणेव उवागच्छह उवागच्छित्ता पत्तेयं-पत्तेयं नामंकिएस आसणेस निसीयह निसीइत्ता दोवई रायवरकण्णं पडिवालेमाणा-पडिवालेमाणा चिट्ठह त्ति घोसणं घोसेह धोसेत्ता मम एयमाणत्तियं पच्चप्पिणह तए णं कोडुबियपुरिसा तहेव जाव पच्चप्पिणंति ।
तए णं से दुवए राया कोडुबियपुरिसे सद्दावेइ सद्दावेत्ता एवं वयासी- गच्छह णं तुब्भे देवाणप्पिया! सयंवरमंडपं आसिय-संमज्जिओवलित्तं सुगंधधवरगंधियं पंचवण्णप्प्फोवयारकलियं कालागरुपवर-कुंदुरुक्क-तुरुक्क-जाव गंधवट्टिभूयं मंचाइमंचकलियं करेह कारवेइ करेत्ता कारवेत्ता वासुदेपामोक्खाणं बहुणं रायसहस्साणं पत्तेयं-पत्तेयं नामंकियाइं आसणाई अत्थ्यपच्चत्थ्याई रएह रएत्ता एयमाणत्तियं पच्चप्पिणह, ते वि जाव पच्चप्पिणंति ।
तए णं ते वासुदेवपामोक्खा बहवे रायसहस्सा कल्लं पाउप्पभायाए० ण्हाया जाव सव्वालंकारविभूसिया हत्थिखंधवरगया सकोरेंट० सेयवरचामराहिं० हय-गय-जाव संपरिवडा सव्विड्ढीए जाव रवेणं जेणेव सयंवरामंडवे तेणेव उवागच्छंति उवागच्छित्ता अनुप्पविसंति अनुप्पविसित्ता पत्तेयं-पत्तेयं नामंकिएसु आसणेसु निसीयंति दोवइ रायवरकन्नं पडिवालेमाणा-पडिवालेमाणा चिट्ठति ।
तए णं से पंड्ए राया कल्लं० पहाए जाव सव्वालंकारविभूसिए हत्थिखंधवरगए सकोरेंट० सेयवरचामराहिं० हय-गय० कंपिल्लपुरं नगरं मज्झंमज्झेणं निग्गच्छड़ जेणेव सयंवरामंडवे जेणेव वासुदेवपामोक्खा बहवे रायसहस्सा तेणेव उवागच्छद उवागच्छित्ता तेसिं वासदेवपामोक्खाणं करयल० वद्धावेत्ता कण्हस्स वासुदेवस्स सेयवरचामरं गहाय उववीयमाणे चिट्ठई ।
[१७१] तए णं सा दोवई रायवरकन्ना कल्लं० जेणेव मज्जणघरे तेणेव उवागच्छड़ उवागच्छित्ता० ण्हाया कयबलिकम्मा कय-कोउय-मंगल-पायच्छित्ता सुद्धप्पावेसाई मंगल्लाई वत्थाई पवर स्यक्खंधो-१, अज्झयणं-१६
परिहिया मज्झणघराओ पडिनिक्खमइ पडिनिक्खिमित्ता जेणेव जिणघरे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता जिणघरं अनुपविसइ अनुपविसित्ता जिणपडिमाणं आलोए पणामं करेइ करेत्ता लोमहत्थयं परामसइ एवं जहा सूरियाभो जिणपडिमाओ अच्चेइ अच्चत्ता तहेव भाणियव्वं जाव धूवं डहइ०, वामं जाणं अंचेइ दाहिणं जाणं धरणितलंसि निहट्ट तिक्खुत्ता मुद्धाणं धरणितलंसि निवेसइ इसिं पच्चूण्णमइ पच्चण्णमित्ता करयल० जाव कट्ट एवं वयासी- नमोत्थु णं अरहंताणं भगवंताणं जाव संपत्ताणं वंदइ नमसइ वंदित्ता नमंसित्ता जिणघराओ पडिनिक्खमइ पडिनिक्खमित्ता जेणेव अंतेउरे तेणेव उवागच्छद ।
[१७२] तए णं तं दोवई रायवरकन्नं अंतेउरियाओ सव्वालंकारविभूसियं करेंति किं ते? वरपायपत्तनेउरा जाव चेडिया-चक्कवाल-महयरग-विंद-परिक्खित्ता अंतेउराओ पडिनिक्खमइ पडिनिक्खमित्ता जेणेव बाहिरिया उवट्ठाणसाला जेणेव चाउग्घंटे आसरहे देणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता किड्डावियाए लेहियाए सद्धिं चाउग्घंटं आसरहं दुरूहइ तए णं से धट्टज्जणे कुमारे दोवईए रायवरकन्ने सारत्थं करेइ
[दीपरत्नसागर संशोधितः]
[122]
[६-नायाधम्मकहाओ]
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