Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 133
________________ तए णं से कविले वासुदेवे जेणेव अवरकंका रायहाणी तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता अवरकंकं रायहाणि संभग्ग-तोरण जाव पासइ पासित्ता पउमनाभं एवं वयासी- किण्णं देवाणप्पिया! एसा अवरकंका रायहाणी संभग्ग- जाव सण्णिवइया? तए णं से पउमनाभे कविलं वासुदेवं एवं वयासी-एवं खल सामी! जंबूद्दीवाओ दीवाओ भारहाओ वासाओ इहं हव्वमागम्म कण्हेणं वासुदेवेणं तुब्भे परिभूयं अवरकंका जाव सन्निवाडिया | तए णं से कविले वासुदेवे पउमनाभस्स अंतिए एयमहूँ सोच्चा पउमनाभं एवं वयासी-हं भो! पउमनाभा! अपत्थियपत्थिया० जाव किण्णं तुम न जाणसि मम सरिसपुरिसस्स कण्हस्स वासुदेवस्स विप्पियं करेमाणे? आसुरुत्ते जाव पउमनाभं निव्विसयं आणवेइ, पउमनाभस्स पुत्तं अवरकंकाए रायहाणीए महया-महया रायाभिसेएणं अभिसंचइ जाव पडिगए । [१८] तए णं से कण्हे वासदेवे लवणसमई मज्झमज्झेणं वीईवयमाणे-वीईवयमाणे गंगं उवागए उवागम्म ते पंच पंडवे एवं वयासी-गच्छह णं तुब्भे देवाणुप्पिया! गंगं महानइं उत्तरइ जाव ताव अहं सुट्ठियं लवणाहिवई पासामि, तए णं ते पंच पंडवा कण्हेणं वासुदेवेणं एवं वुत्ता समाणा जेणेव गंगा महानदी तेणेव उवागच्छंति उवागच्छित्ता एगट्ठियाए मग्गण-गवेसणं करेंति करेत्ता एगट्ठियाए गंगं महानइं उत्तरंति उत्तरित्ता अण्णमण्णं एवं वयंति-पहू णं देवाणुप्पिया! कण्हे वासुदेवे गंगं महानई बाहाहिं उत्तरित्तए उदाहू नो पहू उत्तरित्तए त्ति कटु एगट्ठियं नावाओ नूमेंति नूमेत्ता कण्हं वासुदेवं पडिवालेमाणा-पडिवालेमाणा चिट्ठति । तए णं से कण्हे वासुदेवे ट्ठियं लवणाहिवइं पासइ पासित्ता जेणेव गंगा महानई तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता एगट्ठियाए सव्वओ समंता मग्गण-गवेसणं करेइ करेत्ता एगट्ठियं अपासमाणे एगाए बाहाए रहं सतुरगं ससारहिं गेण्हइ एगाए बाहाए गंगं महानई बासहिँ जोयणाई अद्धजोयणं च वित्तिण्णं उत्तरिउं पयत्ते यावि होत्था । तए णं से कण्हे वासुदेवे गंगाए महानईए बहुमज्झे देसभाए संपत्ते समाणे संते तंते परितंते बद्धसेए जाए यावि होत्था । तए णं तस्स कण्हस्स वासुदेवस्स इमेयारूवे अज्झत्थिए जाव समुप्पज्जित्था- अहो णं पंच पंडवा महाबलवगा जेहिं गंगा महानई बासढि जोयणाई अद्धजोयणं च वित्थिण्णा बाहाहिं उत्तिण्णा, इच्छंतएहिं णं पंचहिं पंडवेहिं पउमनाभे राया जाव नो पडिसेहिए । तए णं गंगादेवी कण्हस्स वासुदेवस्स इमं एयारूवं अज्झत्थियं जाव जाणित्ता थाहं वियरइ, तए णं से कण्हे वासुदेवे महत्तंतरं समासासेइ समासासेत्ता गंगं महानदिं बा-सद्धिं जाव उत्तरइ 3 जेणेव पंच पंडवा तेणेव उवागच्छड़ उवागच्छित्ता पंच पंडवे एवं वयासी- अहो णं तुब्भे देवाणुप्पिया! महाबलवगा जेणं तुब्भेहिं गंगा महानई बासद्धिं जाव उत्तिण्णा, इच्छंतएहिं गं तुब्भेहिं पउमनाहे जाव नो पडिसेहिए । तए णं ते पंच पंडवा कण्हेणं वासुदेवेणं एवं वुत्ता समाणा कण्हं वासुदेवं एवं वयासी-एवं खलु देवाणुप्पिया! अम्हे तुब्भेहिं विसज्जिया समाणा जेणेव गंगा महानई तेणेव उवागच्छामो उवागच्छित्ता एगट्ठियाए मग्गण-गवेसणं तं चेव जाव नमेमो तब्भे पडिवालेमाणा चिट्ठामो । तए णं से कण्हे वासुदेवे तेसिं पंचपंडवाणं एयमढे सोच्चा निसम्म आसुरुत्ते जाव तिवलियं सुयक्खंधो-१, अज्झयणं-१६ [दीपरत्नसागर संशोधितः] [132] [६-नायाधम्मकहाओ]

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