Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 147
________________ तए णं से कंडरीए जाव थेरे वंदइ नमसइ० अंतियाओ पडिनिक्खमइ तमेव चाउग्घंट आसरहं दुरूहइ जाव पच्चोरूहइ पच्चोरूहित्ता जेणेव पंडरीए राया तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता करयल. पुंडरीयं जाव एवं वयासी । एवं खल देवाणप्पिया! मए थेराणं अंतिए जाव धम्मे निसंते से धम्मे इच्छिए पडिच्छिए अभिरूइए तए णं देवाणप्पिया! जाव पव्वइत्तए । तए णं से पुंडरीए राया कंडरीयं एवं वयासी-मा णं तुम देवाणुप्पिया! इयाणिं मुंडे जाव पव्वयाहि अहं णं तुमं महारायाभिसेएणं अभिसिंचामि । सयक्खंधो-१, अज्झयणं-१९ तए णं से कंडरीए पुंडरीयस्स रण्णो एयमद्वं नो आढाइ नो परियाणाइ तुसिणीए संचिट्ठइ, तए णं से पुंडरीए राया कंडरीयं दोच्चंपि तच्चंपिं एवं वयासी-जाव तुसिणीए संचिट्ठइ । ___ तए णं पुंडरीए कंडरीयं कुमारं जाहे नो संचाएइ बहूहिं आघवणाहिं य पन्नवणाहि य सण्णवणाहि य विण्णवणाहि य, आघवित्तए वा जाव विण्णवित्तए वा ताहे अकामए चेव एयमटुं अनमन्नित्था जाव निक्खमणाभिसेएणं अभिसिंचइ जाव थेराणं सीसभिक्खं दलयइ, पव्वइए अणगारे जाए, एक्कारसंगविऊ, तए णं थेरा भगवंतो अण्णया कयाइं पुडरीगिणीओ नयरीओ नलिनिवणाओ उज्जाणाओ पडिनिक्खमंति बहिया जणवयविहारं विहरति । [२१५] तए णं तस्स कंडरीयस्स अणगारस्स तेहिं अंतेहि य पंतेहि य जहा सेलगस्स जाव दाहवक्कंतीए यावि विहरइ, तए णं थेरा अण्णया कयाइ जेणेव पोंडरीगिणी नयरी तेणेव उवागच्छति उवाग्गच्छित्ता नलिणीवणे समोसढा । पुंडरीए निग्गए धम्म सुणेइ तए णं पुंडरीए राया धम्म सोच्चा जेणेव कंडरीए अणगारे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता कंडरीयं वंदइ नमसइ वंदित्ता नमंसित्ता कंडरीयस्स अणगारस्स सरीरगं सव्वाबाहं सरोगं पासइ पासित्ता जेणेव थेरा भगवंतो तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता थेरे भगवंते वंदइ नमंसई वंदित्ता नमंसित्ता एवं वयासी-अहण्णं भंते कंडरीयस्स अणगारस्स अहापवत्तेहिं ओसह-भेसज्जजाव तेगिच्छं आउंटामि तं तुब्भे णं भंते मम जाणसालास् समोसरह, तए णं थेरा भगवंतो पंडरीयस्स एयमटुं पडिसणेति जाव उवसंपज्जित्ता णं विहरंति । तए णं पुंडरीए राया जहा मंडुए सेलगस्स जाव बलियसरीरे जाए, तए णं थेरा भगवंतो पुंडरीयं रायं आपुच्छंति आपुच्छित्ता बहिया जणवयविहारं विहरंति । तए णं से कंडरीए ताओ रोयायंकाओ विप्पमुक्के समाणे तंसि मणण्णंसि असण-पाणखाइम-साइमंसि मुच्छिए गिद्धे गढिए अज्झोववण्णे नो संचाएइ पुंडरीयं आपुच्छित्ता बहिया अब्भुज्जएणं जणवयविहारेणं विहरित्तए, तत्थेव ओसन्ने जाए । तए णं से पुंडरीए इमीसे कहाए लद्धढे समाणे ण्हाए अंतेउरपरियाल-संपरिवुडे जेणेव कंडरीए अणगारे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता कंडरीयं तिक्खुत्तो आयाहिण-पयाहिणं करेइ करेत्ता वंदइ नमसइ वंदित्ता नमंसित्ता एवं वयासी- धन्नेसि णं तुमं देवाणुप्पिया कयत्थे कयपुन्ने कयलक्खणे सुलद्धे णं देवाणुप्पिया! तव माणुस्सए जम्म-जीविय-फले जे णं तुमं रज्जं च जाव अंतेउरं च विछड्डेत्ता विगोवइत्ता जाव पव्वइए, अहण्णं अधन्ने अकयत्थे अकयपन्ने अकयलक्खणे रज्जे जाव अंतेउरे य [दीपरत्नसागर संशोधितः] [146] [६-नायाधम्मकहाओ]

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