Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
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परिणमंति सूरुवा वि पोग्गला दुरुवत्ताए परिणममंति दुरुवा वि पोग्गला सुरूवत्ताए परिणमंति सुब्भिगंधा वि पोग्गला दुब्भिगंधत्ताए परिणमंति दुबभिगंधा वि पोग्गला सुब्भिगंधत्ताए परिणमंति सुरसा वि पोग्गला दुरसत्ताए परिणमंति दुरसा वि पोग्गला सुरसत्ताए परिणमंति सुहफासा वि पोग्गला दुहफासत्ताए परिणमंति दहफासा वि पोग्गला सहफासत्ताए परिणमंति पओग-वीससा-परिणया वि य णं सामी! पोग्गला पन्नत्ता ।
तए णं जियसत्तू राया सुबुद्धिस्स अमच्चस्स एवमाइक्खमाणस्स भासमाणस्स पन्नवेमाणस्स परूवेमाणस्स एयमद्वं नो आढाइ नो परियाणइ तुसिणीए संचिट्ठइ ।
तए णं से जियसत्तू राया अण्णया कयाइ पहाए आसखंधवरगए महयाभडवचडगरआसवाहणिआए निज्जायमाणे तस्स फरिहोदयस्स अदूरसामंतेणं वीईवयइ ।
तए णं जियसत्तू राया तस्स फरिहोदगस्स असभेणं गंधेणं अभिभूए समाणे सएणं उत्तरिज्जगेणं आसगं पिहेइ पिहेत्ता एगंतं अवक्कमइ अवक्कमित्ता बहवे ईसर जाव सत्थवाहपभियओ एवं वयासी- अहो णं देवाणप्पिया! इमे फरिहोदए अमणण्णे वण्णेणं अमणण्णे गंधेणं अमणण्णे रसे अमणुण्णे फासेणं से जहानामए-अहिमडे इ वा जाव अमणामतराए चेव, तए णं ते बहवे ईसर जाव सत्थवाह पभियिओ एवं वयासी- अहो णं देवाणप्पिया इमे फरिहोदए अमणण्णे वण्णेणं अमणण्णे गंधेणं अमणुण्णे रसेणं अमणुण्णे फासेणं से जहानामए-अहिमडे इ वा जाव अमणामतराए चेव ।
तए णं से जियसत्तूं राया सुबुद्धि अमच्चं एवं वयासी- अहो णं सुबुद्धी! इमे फरिदोहए अमण्ण्णे वण्णेणं० से जहानामए-अहिमडे इ वा जाव अमणामतराए चेव, तए णं से सुबुद्धी अमच्चे जाव परियाणाइ] तुसिणीए संचिट्ठइ तए णं से जियसत्तू राया सुबुद्धिं अमच्चं दोच्चंपि तच्चपि एवं वयासी-अहो णं तं चेव ।
___ तए णं से सुबुद्धी अमच्चे जियसत्तुणा रण्णा दोच्चंपि तच्चपि एवं वुत्ते समाणे एवं वयासी-नो खलु सामी अम्हं एयंसि फरिहोदगहंसि केइ विम्हए एवं खलु सामी सुब्भिसद्दा वि पोग्गला दुब्भिसद्दत्ताए परिणमंति तं चेव जाव पओग-वीससा-परिणया वि य णं सामी! पोग्गला पन्नत्ता,
तए णं जियसत्तू राया सुबुद्धिं एवं वयासी-मा णं तुम देवाणुप्पिया! अप्पाणं च परं च तद्भयं च बहुणि य असब्भावब्भावणाहि मिच्छत्ताभिनिवेसेण य वग्गाहेमाणे वप्पएमाणे विहराहि ।
तए णं सुबुद्धिस्स इमेयारूवे अज्झत्थिए चिंतिए पत्थिए मणोगए संकप्पे समुप्पज्जित्थाअहो णं जियसत्तु राया संते तच्चे तहिए अवितहे सब्भए जिणपन्नत्ते भावे नो उवलभइ, तं सेयं खल मम जियसत्तुस्स रण्णो संताणं तच्चाणं तहियाणं अवितहाणं सब्भूयाणं जिणपन्नत्ताणं भावाणं अभिगमणट्ठयाए एयमÉ उवाइणावेत्तए
एवं संपेहेइ संपेहेत्ता पच्चइएहिं परिसेहिं सद्धिं अंतरावणाओ नवए घडए य पडए य गेण्हइ गेण्हित्ता संझाकालसमयंसि विरलमणसंसि निसंत-पडिनिसंतंसि जेणेव फरिहोदए तेणेव उवागच्छड़ उवागच्छित्ता तं फरिहोदगं गेण्हावेइ गेण्हावित्ता नवएस् पडएस् गालावेइ गालावेत्ता नवएस् घडएस् पक्खिवावेइ पक्खिवावेत्ता सज्जखारं पक्खिववावेइ पक्खिवावेत्ता लंछियमद्दिए कारावेइ कारावेत्ता
सत्तरत्तं स्यक्खंधो-१, अज्झयणं-१२
[दीपरत्नसागर संशोधितः]
[92]
[६-नायाधम्मकहाओ]
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