Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 100
________________ तेणं कालेणं तेणं समएणं अहं गोयमा! गुणसिलए समोसढे, परिसा निग्गया, तए णं नंदाए पोक्खरिणीए बहुजणो ण्हायमाणो य पियमाणो य पाणियं च संवहमाणो य अण्णमण्णं एवमाइक्खइ-जाव समणे भगवं महावीरे इहेव गणसिलए चेइए समोसढे, तं गच्छामो णं देवाणुप्पिया समणं भगवं महावीरं वंदामो जाव पज्जवासामो एयं मे इहभवे परभवे य हियाए जाव आणगामियत्ताए भविस्सइ, तए णं तस्स दडुरस्स बहुजणस्स अंतिए एयमझु सोच्चा निसम्म० अयमेयारूवे अज्झत्थिए चिंतिए पत्थिए मणोगए संकप्पे समप्पज्जित्था- एवं खल समणे० तं गच्छामि णं समणं० वंदामि- एवं संपहेइ संपेहेत्ता नंदाओ पोक्खरिणीओ सणियं-सणियं पच्चत्तरेइ जेणेव रायमग्गे तेणेव उवागच्छड़ उवागच्छित्ता ताए उक्किट्ठाए० दद्दरगईए वीईवयमाणे-वीईवयमाणे जेणेव ममं अंतिए तेणेव पहारेत्थ गमणाए । इमं च णं सेणिए राया भंभसारे पहाए कयकोउय० जाव सव्वालंकारविभूसिए हत्थिखंधवरगए सकोरेंटमल्लदामेणं छत्तेणं० सेयवरचामरेहि० हय-गय-रह-भड-चडगर० चाउरंगिणीए सेणाए सद्धिं संपरिवूडे मम पायवंदए हव्वमागच्छइ । तए णं से दबुरे सेणियस्स रण्णो एगेणं आसकिसोरएणं वामपाएणं अक्कंते समाणे अंतनिग्घाइए कए यावि होत्था, तए णं से दद्दरे अथामे अबले अवीरिए अपरिसक्कारपरक्कमे अधारणिज्जमित्तिकट्ट एगंतमवक्कमइ० करयलपरिग्गहियं० नमोत्थु णं अरहंताणं जाव सिद्धिगइनामधेज्जं ठाणं संपत्ताणं, नमोत्थु णं समणस्स भगवओ महावीरस्स जाव सिद्धिगइनामधेज्जं ठाणं संपाविउकामस्स पुव्विंपि य णं मए समणस्स भगवओ महावीरस्स अंतिए थूलए पाणाइवाए पच्चक्खाए जाव थूलए परिग्गहे पच्चक्खाए, तं इयाणिं पि तस्सेव अंतिए सव्वं पाणाइवायं पच्चक्खामि जाव सव्वं परिग्गहं पच्चक्खामि जावज्जीवं सव्वं असण-पाण-खाइम-साइमं पच्चक्खामि जावज्जीवं जंपि य इमं सरीरं इटु कंतं जाव मा फुसंत एयपि य णं चरिमेहिं ऊसासेहिं वोसिरामि त्ति कट्ट, तए णं से दडुरे कालमासे कालं किच्चा जाव सोहम्मे कप्पे दडुरवडिंसए विमाणे उववायसभाए दद्दरदेवत्ताए उववण्णे, एवं खल गोयमा! दद्दरेणं सा दिव्वा देविड्ढी लद्धा पत्ता अभिस-मण्णागया दडुरस्स णं भंते! देवस्स केवइयं कालं ठिई पन्नत्ता? गोयमा! चत्तारि पलविओवमाइं ठिई पन्नत्ता, से णं दडुरे देवे महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ बज्झिहिइ जाव अंतं करेहिइ य । एवं खल जंबू समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं तेरसमस्स नायज्झयणस्स अयमढे पन्नत्ते त्ति बेमि ।। . पढमे सयक्खंधे तेरसमं अज्झयणं समत्तं . • मुनि दीपरत्नसागरेण संशोधितः सम्पादित्तश्च तेरसमं अज्झयणं समत्तं . ० चोदसमं अज्झयणं-तेयली . [१४८] जइ णं भंते! जाव तेरसमस्स नायज्झयणस्स अयमढे पन्नत्ते चोद्दसमस्स० के अट्ठे पन्नत्ते? एवं खलु जंब! तेणं कालेणं तेणं समएणं तेयलिरं नाम नयरं पमयवणे उज्जाणे कणगरहे राया, तस्स णं कणगरहस्स पउमावई देवी, तस्स णं कणगरहस्स तेयलिपत्ते नामं अमच्चे साम दंड-जाव] विहरइ । [दीपरत्नसागर संशोधितः] [99] [६-नायाधम्मकहाओ]

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