Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 115
________________ अण्णया कयाइ सयाओ गिहाओ पडिनिक्खमइ पडिनिक्खमित्ता सागरदत्तस्स गिहस्स अदूरसामंतेणं वीईवयइ इमं च णं सूमालिया दारिया ण्हाया चेडिया-चक्कवाल-संपरिवुडा उप्पिं आगासतलगंसि कणगतिंदुसएणं कीलमाणी-कीलमाणी विहरइ । तए णं से जिणदत्ते सत्थवाहे सूमालियं दारियं पासइ पासित्ता सूमालियाए दारियाए रूवे य जोव्वणे य लावण्णे य जायविम्हए कोडुबियपुरिसे सद्दावेइ सद्दावेत्ता एवं वयासी-एस णं देवाणुप्पिया! कस्स दारिया किं वा नामधेज्जं से? तए णं ते कोडुबियपुरिसा जिणदत्तेणं सत्थवाहेणं एवं वुत्ता समाणा हट्ठतुट्ठा करयल जाव एवं वयासी-एस णं देवाणुप्पिया! सागरदत्तस्स सत्थवाहस्स धूया भद्दाए भारियाए अत्तया सूमालिया नाम दारिया-सुकुमालपाणिपाया जाव उक्किट्ठा । तए णं जिणदत्ते सत्थवाहे तेसि कोइंबियाणं अंतिए एयमढे सोच्चा जेणेव सए गिहे तेणेव उवागच्छद उवागच्छित्ता बहाए जाव मित्त-नाइ-परिवड़े चंपाए० जेणेव सागरदत्तस्स गिहे तेणेव उवागए, तए णं से सागरदत्ते सत्थवाहे जिणदत्तं सत्थवाहं एज्जमाणं पासइ पासित्ता आसणाओ अब्भुढेइ अब्भुद्वेत्ता आसणेणं उवनिमंतेइ उवनिमंतेत्ता आसत्थं वीसत्थं सुहासणवरगयं एवं वयासी- भण देवाणुप्पिया! किमागमणपओयणं? | सयक्खंधो-१, अज्झयणं-१६ तए णं से जिणदत्ते सागरदत्तं एवं वयासी-एवं खलु अहं देवाणुप्पिया! तव धूयं भद्दाए अत्तियं सूमालियं सागरस्स भारियत्ताए वरेमि, जइ णं जाणाह देवाणुप्पिया! जुत्तं वा पत्तं वा सलाहणिज्जं वा सरिसो वा संजोगो ता दिज्जउ णं सूमालिया सागरदारगस्स, तए णं देवाणुप्पिया! भण किं दलयामो सुकं सूमालियाए? तए णं से सागरदत्ते सत्थवाहे जिणद्ततं सत्थवाहं एवं वयासी-एवं खलु देवाणप्पिया सूमालिया दारिया एगा एगजाया इट्ठा जाव किमंग पुण पासणयाए तं नो खलु अहं इच्छामि सूमालियाए दारियाए खणमवि विप्पओगं तं जड़ णं देवाणप्पिया! सागरए दारए मम घरजामाउए भवइ तो णं अहं सागरस्स समालियं दलयामि, तए णं से जिणदत्ते सत्थवाहे सागरदत्तेणं सत्थवाहेणं एवं वृत्ते समाणे जेणेव सए गिहे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता सागरगं दारगं सद्दावेइ सद्दावेत्ता एवं वयासी-एवं खल पत्ता! सागरदत्ते सत्थवाहे मम एवं वयासी-एवं खल देवाणप्पिया! सूमालिया दारिया-इट्ठा तं चेव तं जइ णं सागरए दारए मम घरजामाउए भवइ तो णं दलयामि, तए णं से सागरए दारए जिणदत्तेणं सत्थवाहेणं एवं वुत्ते समाणे तुसिणीए, तते णं जिणदत्ते सत्थवाहे अन्नया कयाइ सोहणंसि तिहि-करण-नक्खत्त-महंत्तसि विपलं असण-पाण-खाइम-साइमं उवक्खडावेइ उवक्खडावेत्ता मित्त-नाइ-जाव सम्माणेत्ता सागरं दारगं हायं जाव सव्वालंकारविभुसियं करेइ करेत्ता पुरिसहस्सवाहिणीयं सीयं दुरूहावेइ दुरूहावेत्ता मित्त-नाइ-जाव परिवुडे सव्विड्ढीए सयाओ गिहाओ निग्गच्छइ निग्गच्छित्ता चंपं नयरिं मज्झमज्झेणं जेणेव सागरदत्तस्स गिहे तेणेव उवागच्छड उवागच्छित्ता सीयाओ पच्चोरूहइ पच्चोरूहित्ता सागरगं दारगं सागरदत्तस्स सत्थवाहस्स उवणेइ । तए णं से सागरदत्ते सत्थवाहे विप्लं असण-पाण-साइम-खाइमं उवक्खडावेइ उवक्खडावेत्ता जाव सम्माणेत्ता सागरगं दारगं सूमालियाए दारियाए सद्धिं पट्टयं दुरूहवेइ दुरूहावेत्ता सेयापीएहिं कलसेहिं मज्जावेइ मज्जावेत्ता अग्गिहोम करावेइ करावेत्ता सागरगं दारयं समालियए दारियाए पाणिं गेण्हावेइ । [दीपरत्नसागर संशोधितः] [114] [६-नायाधम्मकहाओ]

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