Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
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तए णं नंदे मणियारसेट्ठी उत्तरिल्ले वणसंडे एगं महं अलंकारियसभं कारावेइ अणेगखंभसयसण्णिविढे जाव पडिरूवं, तत्थ णं बहवे अलंकारिय-मणुस्सा दिन्नभइ-भत्त-वेयणा बहूणं समणाण य अणाहाण य गिलाणाण य रोगियाण य दुब्बलाण य अलंकारियकम्मं करेमाणा-करेमाणा विहरति ।
तए णं तीए नंदाए पोक्खरिणीए बहवे सणाहा य अणाहा य पंथिया य पहिया य करोडिया य तणहारा य पत्तहारा य कट्ठहारा य-अप्पेगइया ण्हायंति अप्पेगइया पाणियं पियंति अप्पेगइया पाणियं संवहति अप्पेगइया विसज्जियसेय जल्ल-मल-परिस्सम-निद्दखप्पिवासा सुहंसुहेणं विहरंति । रायगिहविणिग्गओ वि यत्थ बहुजणो किं ते जलरमणविविहमज्जण-कयलिलयाहरयकुसुम-सत्थरयअमेगसउणगण-कयरिभियसंकुलेसु सुहंसुहेणं अभिरममाणो-अभिरममाणो विहरइ ।
तए णं नंदाए पोक्खरिणीए बहुजणो ण्हायमाणो य पियमाणो य पाणियं च संवहमाणो य अणणमण्णं एवं वयासी- धण्णे णं देवाणप्पियं! नंदे मणियारसेट्ठी कयत्थे जाव जम्मजीवियफले जस्स णं इमेयारूवा नंदा पोक्खरिणी चाउक्कोणा जाव पडिरूवा, जस्स णं पुरथिमिल्ले तं चेव सव्वं चउसु वि वणसंडेसु जाव रायगिहविणिग्गओ जत्थ बहुजणो आसणेसु य सयणेसु य सण्णिसण्णो य संतुयट्टो य पेच्छमाणो य साहेमाणो य सुहंसुहेणं विहरइ, तं धन्ने कयत्थे कयलक्खणे कयपन्ने कया णं लोया! सुलद्धे माणुस्सए जम्मीजिवियफले नंदस्स मणियारस्स, तते णं रायगिहे सिंघाडग-जाव-पहेस् बहुजणो अण्णमण्णस्स एवमाइक्खड़ एवं भासइ एवं पन्नवेइ एवं परूवेइ- धन्ने णं देवाणुप्पिया नंदे मणियारसेट्ठी सो चेव गमओ जाव सुहंसुहेणं विहरइ ।
तए णं से नंदे मणियारसेट्ठी बहुजणस्स अंतिए एयमढे सोच्चा निसम्म हट्ठतुढे धाराहतकलंबगं विव समूसवियरोमकूवे परं सायासोक्खमण्भवमाणे विहरड़ ।
[१४६] तए णं तस्स नंदस्स मणियारसेविस्स अण्णया कयाइ सरीरगंसि सोलस रोगायंका पाउब्भूया तं जहा
सासे कासे जरे दाहे कुच्छिसूले भगंदरे । अरिसा अजीरए दिट्ठी- मुद्धसूले अकारए ।
अच्छिवेयणा कण्णवेयणा कंडू दउदरे कोढे ।। [१४७] तए णं से नंदे मणियारसेट्ठी सोलसहिं रोयायंकेहिं अभिभूए समाणे कोडुबियपुरिसे सद्दावेइ सद्दावेत्ता एवं वयासी-गच्छह णं तुब्भे देवाणुप्पिया! रायगिहे नयरे सिंघाडग-जाव पहेस् महयामहया सद्देणं उग्घोसेमाणा-उग्घोसेमाणा एवं वयह-एवं खल देवाणप्पिया नंदस्स मणियारस्स सरीरगंसि सोलस रोयायंका पाउब्भूया तं जहा- सासे जाव कोढे तं जो णं इच्छइ देवाणुप्पिया! विज्जो वा विज्जपत्तो वा जाणुओ वा जाणुअपत्तो वा कुसलो वा कुसलपुत्तो वा नंदस्स मणियारस्स तेसिं च णं सोलसण्हं रोगायंकाणं एगमवि रोगायकं उवासमित्तए तस्स णं नंदे मणियारसेट्ठी विउलं अत्थसंपयाणं दलयइ त्ति कट्ट दोच्चंपि तच्चपि घोसणं घोसेह घोसेत्ता एयमाणत्तियं पच्चप्पिणह, तेवि तहेव पच्चप्पिणंति ।
तए णं रायगिहे नगरे इमेयारूवं घोसणं सोच्चा निसम्म बहवे वेज्जा य वेज्जपत्ता य कुसलपत्ता य सत्थकोसहत्थगया य कोसगपाय हत्थगया य सिलियाहत्थगया य गलियाहत्थगया य ओसह-भेसज्जहत्थगया य सएहिं सएहिं गिहेहिंतो निक्खमंति निक्खमित्ता रायगिहं मज्झंमज्झेणं जेणेव सुयक्खंधो-१, अज्झयणं-१२
[दीपरत्नसागर संशोधितः]
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[६-नायाधम्मकहाओ]
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