Book Title: Agam 06 Nayadhammakahao Shashtam Angsuttam Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
View full book text ________________
सुयक्खंधो-१, अज्झयणं-१४
रहस्स पुत्ते पउमावईए अत्तए ते णं तुमं देवाणुप्पिए! इमं दारगं कणगरहस्स रहस्सियं चेव अनुपुवेणं सारक्खाहि य संगोवेहि य संवड्ढेहि य तए णं एस दारए उम्मुक्कबालभावे तव य मम य पउमावईए य आहारे भविस्सइ त्ति कट्टु पोट्टिलाए पासे निक्खिवइ निक्खिवित्ता पोट्टिलाओ पासाओ तं विणिहायमावण्णियं दारियं गेण्हइ गेण्हित्ता उत्तरिज्जेणं पिहेइ पिहेत्ता अंतेउरस्स अवद्दारेणं अनुप्पविसइ अनुप्पविसित्ता जेणेव पउमावई देवी तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता पउमावईए देवीए पासे ठावेइ जाव पडिनिग्गए ।
तए णं तीसे पउमावईए देवीए अंगपडियारियाओ पउमावइं देविं विणिहायमावण्णियं च दारियं पयायं पासंति पासित्ता जेणेव कणगरहे राया तेणेव उवागच्छंति उवागच्छित्ता करयल० एवं वयासी- एवं खलु सामी! पउमावई देवी मएल्लियं दारियं पयाया, तए णं कणगरहे राया तीसे मल्लिया दारियाए नीहरणं करेइ बहूइं लोगियाइं मयकिच्चाई करेइ करेत्ता कालेणं विगसोए जाए ।
तणं से तेयलिपुत्ते कल्लं कोडुंबियपुरिसे सद्दावेइ सद्यावेत्ता एवं वयासी खिप्पामेव चारगसोहणं जाव ठिइपडियं० जम्हा णं अम्हं एस दारए कणगरहस्स रज्जे जाए तं होउ णं दारए नामेणं कणगज्झए जाव भोगसमत्थे जाए |
[१५०] तए णं सा पोट्टिला अण्णया कयाइ तेयलिपुत्तस्स अणिट्ठा अंकता अप्पिया अमणुण्णा अमणामा जाया यावि होत्था- नेच्छइ णं तेयलिपुत्ते पोट्टिलाए नामगोयमवि सवणयाए, किं पुण 'दंसणं वा परिभोगं वा? तए णं तीसे पोट्टिलाए अण्णया कयाइ पुव्वरत्तावरत्तकालसमयंसि इमेयारूवे अज्झत्थिए चिंतिए पत्थिए मणोगए संकप्पे समुप्पज्जित्था एवं खलु अहं तेयलिस्स पुव्विं इट्ठा कंता पिया मणुण्णा मणामा आसि इयाणिं अणिट्ठा० जाया, नेच्छइ य तेयलिपुत्ते मम नामं जाव परिभोगं वा ति कट्टु ओहयमणसंकप्पा जाव झियायइ ।
तए णं तेयलिपुत्ते पोट्टिलं ओहयमणसंकप्पं जाव झियायमाणिं पासइ पासित्ता एवं वयासीमा णं तुमं देवाणुप्पिए! ओहयमण-संकप्पा जाव झियाहि तुमं णं मम महाणसंसि विपुलं असण-पाणखाइम-साइमं उवक्खडावेहि उवक्खडावेत्ता बहूणं- समण - माहण- जाव वणीमगाणं देयमाणी य दवावेमाणी य विहराहि, तए णं सा पोट्टिला तेयलिपुत्तेणं अमच्चेणं एवं वुत्ता समाणी हट्ठा तेयलिपुत्तस्स मट्ठे पडिसुणेइ पडिसुणेत्ता कल्लाकल्लिं महाणसंसि विपुलं असणं जाव दवावेमाणी य विहरइ ।
[१५१] तेणं कालेणं तेणं समएणं सुव्वयाओ नामं अज्जाओ इरियासमियाओ जाव गुत्तबंभचारिणीओ बहुस्सुयाओ बहुपरिवाराओ पुव्वाणुपुव्विं चरमाणीओ जेणामेव तेयलिपुरे नयरे तेणेव उवागच्छंति उवागच्छित्ता अहापडिरूवं ओग्गहं ओगिण्हंति ओगिण्हित्ता संजमेणं तवसा अप्पाणं भावेमाणीओ विहरति तए णं तासिं सुव्वयाणं अज्जाणं एगे संघाइए पढमाए पोरिसीए सज्झायं करेइ जाव अडाणीओ तेलिस्स गिहं अनुपविट्ठाओ ।
तए णं सा पोट्टिला ताओ अज्जाओ एज्जमाणीओ पासइ पासित्ता हट्ठतुट्ठा आसणाओ अब्भुट्ठेइ वंदइ नमंसइ वंदित्ता नमंसित्ता विपुलेणं असण- पाण- खाइम - साइमेणं पडिलाइ पडिलाभेत्ता एवं वयासी- एवं खलु अहं अज्जाओ! तेयलिपुत्तस्स पुव्विं इट्ठा कंता पिया मणुण्णा मणामा आसि इयाणिं अणिट्ठा जाव दंसणं वा परिभोगं वा०, तं तुब्भे णं अज्जाओ बहुनायाओ बहुसिक्खियाओ बहुपढियाओ बहूणि गामागर-जाव आहिंडह बहूणं राईसर- जाव गिहाई अनुपविसह तं अत्थियाइं अज्जाओ! केइ कहिंचि [दीपरत्नसागर संशोधितः]
[102]
[६-नायाधम्मकहाओ]
Loading... Page Navigation 1 ... 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145 146 147 148 149 150 151 152 153 154 155 156 157 158 159