Book Title: Ratribhojan Pariharak Ras
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 23
________________ (१) खाल,एक जीव दोय काय ॥हिणाराणाए। रूपवंती ने पतिव्रता रे लाल, निर्मल शील धरंत ॥हिणा विनय वंती मुख मलकती रे लाल,पुण्य नारी मिवंत ॥ ॥ हि ॥रा० ॥ १० ॥ जयसेना कुंअरी तसु रेला ल, सुरकन्या अवतार ॥ हि ॥ यौवन पुरुष मन मोहनी रे लाल, गुणनो नहिं को पार ॥हिाराणा ॥११॥ चतुर विचक्षण सुंदरी रे लाल, चोशठकला जमार ॥हि॥ गजगति चाले गेलशुं रे लाल,रूप दी धुं किरतार ॥ हि॥रा॥१२॥ नीपावी निजहा यशुं रे लाल, ब्रह्मायें करीय यतन्न ॥ हि ॥ एहवी कन्या फूटरी रे लाल, अवर न केही अन्न ॥हि॥ ॥रा ॥ १३ ॥ सखीवर्गमाहे रमे रे लाल, निशि दिन मन उरंग ॥ हि ॥ कहे जिवहर्ष पूरी थ रे लाल, नवमी ढाल सुरंग ॥ हि ॥रा ॥१४॥ ॥दोहा॥ ॥ चिडाचिडी एकण दिने, तरुवर केरी माल ही चंतां दीग तेणे, मनमां चिंते बाल ॥१॥किहां एक में दीगढूंतां, पंखी करतां केल ॥माले रमतां हिंच तां, चिडा चिडी मनमेल ॥२॥ उहापोह करतां पडी, थअचेत तेणिवार ॥ सांजरियो जव पाउलो, चिंते Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org

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