Book Title: Mahabharatam
Author(s): Nagsharan Sinh, 
Publisher: Nag Prakashan Delhi

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Page 710
________________ मोमन्महाभारतम् ।। श्लोकानुश्मनी ७०५ व्यूढोत्तरांसान्पृथुलोहि (बन) ११६.१३ म्येतु सन्यापजं दुःखं तव(वन) ३०२.८ व्रतं यथोपादिष्टं तु (वन) २६६.१६ बीडिता साऽभवत् (वन) २०६.१७ शकटापणवेशाश्च (वन) २३६.२७ व्यूढोरस्क महाबाहो (वन) ६४१३ ब्रज तीर्थानि नियतः (वन) ८५.१०७ व्रतं वं मम सोकोऽयं (वन) ३००.२५ व्रीहिद्रोणः परित्यक्तः (वन) २६०.१ शकटापणवेशाश्च (बन) २४२.१० म्यूढोरकं ततो भीमः(भीष्म) ९६.२३ वजनरूपिणयोग्येष्ठ (आ) ९४.३४ व्रताधिपः परं ब्रह्म (अनु) १७.१५३ बीहिद्रोणस्य तम्यस्य (वन) २६०.६ शकटोव्या परस्याप्सु (अनु) ८५.१५० व्युद्धोरस्का दीर्घभुजाः (कर्ण) १२.१६ व्रजन्तं लोकममलम (शल्य) ५०.३२ व्रतानां कि फलं प्रोक्तं (अनु) ७५.२ ब्रीहिद्रौणिकमास्यानं (आ) २.५५ शकप्रभृतयश्चैव सर्वे (वन) २७६.११ ब्यूढोरसको महाबाहु (द्रोण) ७७.२२ वजन्तु प्रातरस्तेमी (सभा) ७६.२६ व्रतावसाने च सुभान (शांति) ३३६.३५ वीहो पुरुपे फले चंब (अनु) १३६.६ शकलोकगतं पार्थं धुत्वा (वन) ४८.२ व्युद्धारस्को महाबाहु (द्रोण) १२६.४० व्रजन्तु शेषाः स्वपुराणि(कर्ण) ८८.२४ वतिनां धर्मशीलानां (द्रोण) ७८.२६ शकस्य तु सभा दिव्या (सभा) ७.१ व्यूढोरस्को दीर्घभुजौ (द्रोण) १४२.४१ । व्रजानेव तु बीभत्सुः (उद्योग) ८३.५० वतिनो नियमस्गाश्च ये(अनु) २३.५५ शकस्य तु सभायां तु (सभा) १२.५ ब्यूढोरस्को दीर्घभुजी (सभा) २३.२८ बजे वाश्यथवाऽरणये (वन) २००.६२ प्रतिभिर्बहुभि: कीर्ण (मनु) १०.५ शकाः किराता दरदा (द्रोण) ११६.१५ व्यूथ यन्त मिथो भिन्ना(कर्ण) ८७.३७ व्रतच तपो वाऽपि (वन) २३३.७ व्रतैश्च नियमश्चैव (शल्य) ३७.२३ शंयोरप्रतिमा भार्या सत्या(वन)२१९.४ शकानां पलवानां च (उद्योग) ४.१५ व्यूहःक्रौञ्चरुणो नाम(भीष्म) ५०.४० व्रतपर्यापरीनस्य (अन) १३६.३२ व्रतैश्च नियमश्चैव (शस्य) ४८.१० शंयोरभित्रवन्ताय (अनु) १४.३०६ शकाभिषेके सुमहदनुज (वन) ४०.३ व्यूहप्रमुखतस्तेषां (दोण) ७.२६ व्रतप्रतिनिधिचव (वन) १८५.३१ व्रतश्च विविधब्रह्मस्वा(आ) १५.८ शंराश्चाशीविषाकारा (वन) २२.२ शका यवनकांबोजास्तास्ताः (अनु)३३.२१ व्रतमेतन्मम सदा (उद्योग) १९२.६६ व्यूह्यन्त्रायुधाना द्य (शांति) ८५.३२ व्रतोपवासबंडभिः कृतं (सभा) ४१.२८ शंस मे तद्यथा (भीष्म) १४.५३ शका यवनकाम्बोजास्तथा (द्रोण)२०.७ व्रतमेतन्महाबाहो विषयं (वन) १८०.७ व्यूहस्यैव पुनार (द्रोण) ११७.३४ नवाज तरसा वेगवायू (आ) ३३.१६ शंसिता पुरुषव्याघ्र (शांति) ११५.६ शकास्तुषरा यवनाश्च (कर्ण) ८८.१७ व्यूहस्योरसि ते राजन (द्रोण) २०.१४ व्रतवन्तो नराः केचित (अनु) १४५.५६ व्रात्यानां दासमीयाना (कर्ण) ४५.२० शकटः पद्यकश्चा! (द्रोण) ७५.२७ शकास्तुषाराः कङ्काश्च (सभा)५१.३० व्यूह भीष्मेण चाभेद्य' (भीष्म) २१.२ व्रतं चचार धर्मात्मा (अनु) १३६.१० ब्रात्या: संक्लिष्ट (द्रोण) १४३.१५ शकटस्य तु राजेन्द्र (द्रोण) ८७.२६ शकुनानामिवाकाशे (शांति) १८१.१६ व्यूहं क्यू ह्य महेपासो (कण) ११.१४ व्रतं परति या नित्यं (अनु) १४६.५३ वियतां च वर पार्थ (भीष्म) ४३.४० शकटस्यास्य महतो (अनु) ११७.१० शकुनानामिवाकाशे (शांति) ३२२.१६ व्यहानां च समार (उद्योग) १६५१० व्रतं चरेतां ते देव्यो (आ) १०५.४२ त्रियमाणे तथा पोत्रे (उद्योग) १०४.१३ शकटानि रथाश्चैव (आश्व) ६५.१९ शकुनाश्चापसव्या नो (विरा) ४६.२७ व्यूहेष्वालोऽयमानेषु (द्रोण) १२६.१ व्रतं चतुमिहाया तस्त्वहं (अनु) १३६.३३ वीडमाना खजं कुन्तु (आ) ११२.८ शकटापणवेशाश्च (आश्रम) २२.२१ शकुनानां फलं वाथ (वन) ६५.२४ व्यूह्य व्यूह महाराज (शल्य) ८.२१ व्रतं भिन्धीति वक्त' (वन) २६६.७ वीग चात्र न कर्तव्या (वन) १६१.४५ शकटापणवेशाश्च (उद्योग) १५१.५८ शकुनिः पांडुपुत्राभ्यां (द्रोण) ६६.२४ बेतु ते मानसं दुःचं (आ) १६५.११ ब्रतं यज्ञान्नियमान (आश्व) १३.११ ब्रोडाजग्मुः पुरायाः (स्त्री) १०.१४ शकटापणवेशाश्च (उद्योग) १६६.२६ शकुनिः प्रतिविन्ध्यं तु(भीष्म) ४५.६३ For P Pesona sely

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