Book Title: Mahabharatam
Author(s): Nagsharan Sinh, 
Publisher: Nag Prakashan Delhi

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Page 729
________________ भीमन्महाभारतम् । श्लोकानुक्रमणी ७२४ शेष किंचित्प्रपश्यामि(भीष्म) १४.६४ शेषे ह्यवस्थिते तात (स्त्री) १५.२३ शैने याभ्युपपत्ति ते (द्रोण) २.०.६३ शैलादभ्यच्छ्यवता च(वन) १६०.३६ शोक्षं मे वर्धयत्येष (सौप्तिक) ४.३० शेष कुर्याद्गिरेवंजो (वन) ४६.१५. शेषोत्सर्ग कर्मभिर्देहमोक्षे (अनु)७६.१२ शैनेयेन ध्र वमात्तायुधेन(उद्योग) ४. शैलादस्मान्मही गन्तु(शांति) ३२८.४ शोक राजन् व्यपनुद (स्त्री) १.२३ शेषं चाकल्पयद्देव (भीष्म) ६७.१३ शेषोऽनन्तो वासुकिश्च (आ) ६५.४१ शैनेयोऽपि गुरोः पुत्रं (भीष्म) ११६.१. शैलास्तस्यास्थिसंज्ञास्त(शांति) १८२.१७ शोकार्णवे निमग्नोऽहं (कर्ण) ५.२५ शेषं तु दशधा कार्य (अनु) ४७.१२ शेषो भला हमेवंतां (वन) १८६.११ शैनेयोऽपि ततः क्रुद्ध (भीष्म) १०१.४२ शैलेऽस्मिन्राक्षसाकीर्ण (वन) १४०.१२ शोकार्णवे निमग्नो (कर्ण) ८.२६ शेषांश्च पाण्डवान् (द्रोण) १६४.३० । शेषोऽसि नागौत्तम धर्म (आ) ३६.२३ शैनेयोऽयं चेदयश्च (उद्योग) २८.११ शैवालं शीर्णपणं वा (अनु) १४२.४१ शोकार्णवे महाघोरे (कर्ण) ४.४ शेषाणि चंव पानानि(अनु) १०४.१२२ शक्यां तात प (उद्योग) ५१.२८ शव्यसग्रीवयुक्तेन रथेन (वन) २०.१३ शोकः क्रोधश्च लोभश्च (उद्योग)४५.१ शोकेनाभिहत: सोऽय (आ) ६.२ शेषा दैत्यगणा पोरा(वन) २३१.१.० शक्ष्यं स्वरं समास्याच(शांति)३४७.५५ शैव्यसुग्रीवयुक्तेन रखेन (वन) २२.४५ शोकदैन्यसमाविष्टा (शांति) १५३.१०६ शोको द्विगुणतां याति(शांति) १५३.६४ शेषा नृपतयो वीराः (कर्ण) ११.३२ शैनेयभीमार्जुनवाहिनीशं (द्रोण)८.२८ शव्यस्य नपतेः पुत्रः (द्रोण) ५५.५ शोकबुद्धि तदा चके न (आ) १७७.७ शोचते चैव कारुण्य (आ) ४५.१६ शेषान्न भोक्ता वचन(शांति)३५५.११ शैनेयः शरसङ्गतु (भीष्म) १११.४ शैव्या च सत्यवांश्चंव (वन)२६८.२६ शोकमस्मल्कतं प्राप्य (आश्म) २.६ शोचतो न भवेत् (वन) २१६.२१ शेषान्मुप भुजाना (अनु) १४६.५० शैनेयरस छन्न तव (कर्ण) ६१.५२ जीब्या च सह सावित्र्य(वन) २६६.१० शोकमापु: परे चैव (द्रोण) १०२.३२ शोचतो हि महाराज (द्रोण) ७१.१६ शेषाः प्रजानां पतयः (अनु) ८५.११० शैनेयः शयेनवसंख्ये (द्रोण) १२०.३६ शैव्या व सुषुवे पुत्रं (वन) १०६.२० न) १०६.२० शोकसन्तप्तहृदया (आश्व) ७९.३६ शोचन्तमनुशोचन्ति (उद्योग) १३६.५ शेषाः प्रतिययुत्ता (भीम) ८१.३३ शैनेयसाहितो धीमान् (शांति) ५३.२० शैब्यो गोबासनो राजा(द्रोण। ६५.३८ । शोकसंमढहृदयो दुःखेन (द्रोण) ७४.२ गोल शेषाश्च विबुध (शांति) ३४३.६२ शैनेयः सात्यकिः (द्रोण) १२६.१० शैब्यो गोबासादो युद्ध (द्रोण)६६.११ गोरस्थान सहस्राणि (शांति) २५.२० शोचन्त्यस्तत्र रुदुः (शल्य) २६.७० शेषा सृष्टा हन्तवन्तो(शांति)६४.२२ । शैनेयस्तु रणे कूद (द्रोण) १७१.१८ शरः कनकपुख्रश्च (भीम) ११६.३ शोकस्थान सहस्राणि (शांति) ३३०.२ गोचलन्दयते न कोण) , शेषास्तु च्छिन्नघन्वान (द्रोण) ४८.३३ शैनेतस्य धनुश्छित्वा(द्रोण) ११५.४८ शैरः सुतीक्ष्णः शतशोड(द्रोण) ११८८ शोकस्थानसहस्राणि(शांति) १७४.४० शोचामि पृथिवी होना(शांति)२७.२३ शेषास्तु पाण्डवा राजन् (वन)२५६.१८ शैनेयं तु रणे कुलो (भीष्म) ६६.२३ शरीषकं महेत्वं च नश(सभा) ३२.६ शोकस्थानसहस्राणि (वन) २.१५ शोचितव्यं मया चैव (बाश्व) १.१० शेषास्त्वन्ये महाराज (भीष्म) ६६.१९ शैनेयं योधयामास (भीष्म) १११.१५ शैलमन्यन्महाराज (भीष्म) १०२.२१ शोकस्थानसहस्राणि (स्त्री) २.२२ शोचिष्यसे महाराज(उद्योग)१६३.४. शेषां येऽन्येभवं (भं ष्म) ६४.३६ मैनेयं शरवर्षाणि (द्रोण) १५५.६ शैलशृङ्गेष रम्येषु देवता(आ)१५५.२२ शोकस्थानं तु तच्छ त्वा(द्रोण)०.१७ शोच्या गान्धारी पुष (मा) १.२१६ शेषभ्यश्चैव वक्त्रस्य (शांति) ३३६.८ शैनेयं शरवर्षण (कर्ण) ५५.२५ धौलपचनप व्यदीयंन्त (वन) १७५.६ शोकस्यान्तं न पश्यामि (कर्ण) १.६ शोच्या भवति बघूना(शांति) १४८.३ शेषेवास्य कार्येण (उद्योग) १०४.२० शैनेयं स तु निभिद्य (भीष्म)१०१.४६ शैलाश्च विविधाकारान् (अनु) १६.५६ शोकं त्यजत दैन्यं च(शांति) १५३.४. शोच्येयं भारती सेना(द्रोण) १२२.१० For Personal use only

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