Book Title: Mahabharatam
Author(s): Nagsharan Sinh,
Publisher: Nag Prakashan Delhi
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भीमन्महामारतम् । श्लोकानुकमनी
बड़वान् धार्तराष्ट्रस्य (द्रोण) ७६.१ षण्मासानानं तस्य (बनु) १०६.४८ षष्टि काण: शतं बढः (अनु) १७.१८ वष्ठे काले मयाहारः (वन) १८०.१६ संयते मयि नूनं (शांति) २२७.६८ बड़सा निवहन्त्येता (शांति) २८४.४५ षण्मासान्सप्तमे मासि (स्त्री) २०.२६ षष्टि गवां सहस्राणि (विरा) ३५.५ षष्ठे काले व्रतवती (आश्व) १०.७४ संयन्तारः प्रहार (उद्योग) १६५.२१ षडात्रभोजनश्चैव (शांति) ३०३.१७ षष्टया पत्रिंशता (भीष्म) १२.५१
पष्टि सहस्राणि पतन्ति (आ) १०.८ पछे काले सदा विप्रो (प्राश्व)९०.२६ संयन्ता सहदेवस्तु धीम्यो(सभा)७८.११
पाष्ट सहस्राण पतान्त (आ) ०.८ षड्वक्त्रं कृष्ण शुक्लं च (स्त्री) ५.१५ षष्टया विभेदाश च (कर्ण) ८६.७६ षष्टि वर्ष सहस्राणि (अनु) १२५.७६ षष्ठो हि दिवसस्तेऽद्य (शांति) ३५८.५ संयमाश्चानुशंस्य (आश्व) १८.१६ षड़बकस्य तु महात्म्यं (वन)२२६.१४ षष्टया रथसहसैश्च (द्रोण) १५६.१२०
पष्टि वर्षसहस्राणि (द्रोण) २०१.५६ पाइगुण्यगुणसा रेषा (शांति) ५६.७६ संयातिः खलु दृषद्वतो (आ) ६५.१४ बविशतिमसंक डो (भीष्म) ७९.१० षष्टया रथसहस्र स्तु (भीष्म) १७.३२
पष्टि वर्षसहस्राणि (भीष्म) ७.३२ पाइगुण्यमिति यत्प्रोक्त (शांति)६६.६७ संयावं कसरं मांस (अनु) १०४.४१ षड्विशं विमलं बुद्ध (शांति) ३०८.७ षष्टया शराणां तं (द्रोण) १४७.१५
षष्टि वर्षसहस्राणि (शांति) १२६.५ षाड्गुण्यं च त्रिवर्ग (शांति) ६६.६६ संयुक्त एकदुःखश्च (उद्योग) १५१.६ षडविशेन प्रबुदन (शांति) ३०८.१७ पष्टिकोटिसहस्राणि (वन) २८३.४
षष्टि वर्षाणि (सौप्तिक) १६१५ षोडश स्त्रीसहस्राणि (मो) ५.६ संयुगं ये गमिष्यन्ति (उद्योग) ५१.२७ षड़विशो राजशार्दूल(शांति)३०८.११
षष्टिदन्तावष्टवंष्ट्री (शांति) ३४३.३७ पष्टि मतसहस्राणि (आश्व) ६२.३ षोडश स्त्रीसहस्राणि (स्वर्ग) ५२५ संयुक्तं बहहास : सत्व (भा) २२.७ षड्विंशोऽहमिति (शांति) ३०८.१६ षष्टिनागसहस्राणि (द्रोण) ६६.३०
पष्टि शतसहस्राणि (स्वर्ग) ५५४ षोडशांष्टी वरांश्चापि(अनु) १४.३७३ संयुक्ताः काममन्युभ्यां (गांति) ७.२० षड्विधं दुर्गमास्थाय (शांति) ८६.४
षष्टेन तु ध्वजं राज्ञः (कर्ण) २८.६ षोडशी तुकला सूक्ष्मा (शाति) ३०.४ संयुक्तात्मा समरेव (शांति) २४.२६ षषणामात्मनि नित्याना (उद्योग)२३.५३ पष्टिः पत्रसहस्राणि (वन) १०७.४ षष्ठया शरः सयति (भीष्म) ८५.७ पोहोमानि वर्षाणि (आश्रम) २६.३८ संयुक्ता विप्रयुक्ताश्च (बा) १२१.२६ षण्णामात्मनि नित्याम् (वन)२११.२२ षष्टिः पूषसहस्राणि (शांति) २६.१३१ षष्ठस्तू चेतना नाम (वन) २१०.१९
संयुक्ता सा हि धर्मेण (आ) १२३.५ पण्णामात्मनि बुद्धो(शांति) २३६.२६ षष्टिमाहुः शतान्यस्य (भीष्म)१२.४२ षष्ठस्तु मतिमान्यो व (आ) ६७.५३
संयुगं गच्छ (उद्योग) १६०.१२० पण्णामात्पनियुक्ना नाम (वन)२११.२४ षष्टिरुष्ट्रसहस्राणि (आश्व) ६५.१८ षष्ठं अंशं क्रतोस्तस्य (अनु) ६६.२६
संयुगं गच्छ भीष्मेण(उद्योग)१६१.३८ षण्णामेको पिबद्धनु (शांति) ६०.२५ पष्टिांगसहस्राणि (उद्योग) १९ER षष्ठं अध्ययनं नाम (द्रोण) १९७.२५
संयच्छद मामकानश्वां (विरा)३७.१८ संयुगे च प्रकाशेता (शल्य). ५५.२७ षष्णां तासां ततः प्रीत: (अनु) ८६.७ षष्टिश्च गावस्त्रिशताश्च (आ) ३.६०
षष्ठं छागमयं वक्व (वन) २२८.१३ संयच्छामि हयानेष (कर्ण) ३४.७६ संयुगे च प्रकाशेते (शल्य) ५५.२१ षण्णां तु प्रवरं तस्य (वन) २२८.१४ षष्टिश्चाश्वसहस्राणि (विरा) ३१.३४ षष्ठीप्रियश्च धर्मात्मा (वन) २३२.६ संयतः सततं युक्त (आश्व) १६.२० संयुगे वै महाराज (उद्योग) १५.२८ वण्णां योधप्रवीराणां (द्रोण) १७०.२८ षष्टिस्तानि सहस्राणि (भीष्म) ७.३१ षष्ठी या ब्राह्मणा: (वन) २२६.५० संयतात्मा भयात्तेषां(शांति) ३१६.२३ संयुज्यमानानि निशन्य(शांति) ३५४.६ षण्मार्गणानामयुतानि (कर्ण) ७६.१६ षष्टिहब उपस्पृश्य (अनु) २५.३६ षष्ठे काले ममाहारो (आश्व) ५७.५ संयताश्च हिवाश्च (शांति)३३१.१. संयुद्धयमानो बहुभि (भीष्म) १०६.३०
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