Book Title: Mahabharatam
Author(s): Nagsharan Sinh, 
Publisher: Nag Prakashan Delhi

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Page 791
________________ भीमन्महाभारतम् ।। श्लोकानुकमणी स सिंहनादं विननाद (शल्य) ५७.६७ स सेन्ममार सृजंय (शांति) २६.६६ स स्म नित्यं निशापाये (उद्योग) ६६.६ स हतः प्रापतद्वाज न (शल्य) १०.५१ स हत्वा रावणं क्ष द्रं (वन) २६१.१ स सिद्धचक्षुषा दृष्ट्वा । आ)१७६.३४ ससैन्यः पाण्डवानीव म(भीम)४८.४६ सस्मार च पुरावृत्तां (सभा) ३६.१२ सहतानामनीकानां (भीम) २४.५ स हत्वा सर्वकालिङ्ग(भीष्म) ५४.११७ स सुनाभं सहस्रारं(सौप्तिक) १२.२० संसैन्यं समरे ऋद्धो (भीष्म) ८१.३१ सस्मार तां देवसेना- (वन) २२६.४५ सहताश्वादवप्लुत्य (द्रोण) ४३.१४ सहदेव कथं तस्य समीपे (विरा) ३.७ स सुप्त इव चाण्डाल (शांति) १४१.४४ ससैन्याः प्रययुः सर्वे (सभा) २५.६ सस्मार वृषभस्कंध (कर्ण) ३१.१४ स हताश्वादवप्लुत्य (भीष्म) ८२.१६ सहदेवजयत्सेनी मेघ (आ) १८६.८ स सुप्तां मातरं दृष्ट्वा (आ)१५१.२१ ससैन्यास्ते न्य वर्तन्त (द्रोण) १५४.१३ सस्यानां सर्वबीजाना(शांति) ६०.२६ सतावास्यात तण भीष्म) ४६.४. सहदेव निवर्तस्व ननु (सभा) ७९.२८ ससुरासुरगन्धर्व सम(अनु) १४६.१३५ ससैन्यो सहसैन्यौ (शल्य) ८.३४ बान्तवन) १८०.८० स हताश्वान्महाबाह (भीष्म) ८२.५३ सहदेवं नृणां सान्त्वपूर्व(सभा) ३१.५४ ससुरासुरगन्धर्वाः (द्रोण) ३३.११ स सोमदत्तः कुशली (उद्योग) २३.१० सस्यस्यान्यस्य (अनु) १११.७२ स हताश्वे रथे तिष्ठन् (भीष्म) ४७ ३८ सहदेवमथायान्तं (द्रोण) १६५.७ ससुरासुरगन्धर्वा (द्रोण) १५५.७ स सोगमतिकान्तत्वा (आ) १७१.१९ सस्वजात परिप्रीती (शल्य) ३४.१० स हताश्वे रथे तिष्ठन (भीष्म) ६१.२४ सहदेवमयायान्तं (द्रोण) १६७.१ स सुहृच्छोक्दो जातः (वन) २४६.१४ स सौबलमभिद्रुत्य (शल्य) २८.४६ सस्वनाधिरोहध्वं (वन) २४३.६ स हताश्वे रथे तिष्ठन् (भीष्म)७६.३७ सहदेवं तथा क्रुद्ध' दहन्तं (कर्ण) २३.१ स सुहृद्भिरमात्यैश्च (वन) २५१.१८ स सौबलेन सहितस्तथा(वन)२३८.१३ स स्वर्गसदृशो (शांति) १९२.१० स हताश्वे रथे तिष्ठन (भीष्म) ८३.३८ सहदेवं तथा यान्तं (द्रोण) १०६.१३ स सूताश्वध्वजं तस्य (द्रोण) ४५.२० स सौबलेयमानाय्य कर्ण (वन) ७.२ स स्वरं ब्रूहि विप्रर्षे (आश्व) ५६.१५ सह तर्मुनिभिः सर्वं (अनु) १६८.६ सहदेवं तथा यान्तं (भीष्म) १११.२८ समतो भार्यया सार्ध (वन) ३०६.८ स सोमदत्तं स्त्वरित (द्रोण) २५.५४ सहकारान्प्रफुल्लाश्च कतका(अनु.५४. स हतो द्रौपदेयेन (भीष्म) १२०.७ सहदेवं तव सुतो हयपृष्ठ शल्य)२७.३२ स सूदरूपः परमेण वर्चसा (विरा)८.२ सस्त्रीकुमारं च पुरं (शांति)१७२.१७ सहज कर्म कौन्तेय (भीष्म) ४२.४८ सह तोयेन तृषिता (वन) ११०.३६ सहदेवं तु नकुलो वारयि(कर्ण)२२.१६ स सूर्यमभितो याति (आ) २५.६ सस्त्रीकुमारैः कुरुभिः (वन) २४६.२० सहजं कवचं विभ्रत् (आ) १११.१९ स हतो हस्तियूथेन (बन) ६५.३८ सहदेवं शकुनये (उद्योग) १६४.८ ससूने तत्र बापि भवतु(कर्ण) ३३.३० स स्त्रीगसावतो राजा (वन) २४०.६ सहजं कवचं बिभ्रत् (आ) १३६.२ सह त्वया हि मेऽवध्याः (सभा) ४५.३ सहदेवं समासाद लिवि(शल्य)२८.३६ ससृजे नाभितः पूर्वः(शांति) ३४६.१८ स स्थावरं जङ्गम (अनु) १५८.४१ सहज चिरकारित्व (शांति) २६६.५६ स हत्वा तु नरश्रेष्ठ (आ) १०१.१० सहदेवं हि मे वीर (विरा) १६३७ ससूजयाना सवषा (कण) ३.१९ म स्नात्वा प्राप्स्यते (शल्य) ४८.५९ सहज मे विष कुण्डले (वन) ३१०.१० महत्वा दानवगणान (बन)१३१११२ सहदया बुत्वा (जाबमा " ससृष्ट्वा पृथिवा (शाति) २०७.६ स स्नुषामब्रवीत (स्त्री) १४.६ महजश्चेदिमत्स्यानां (उद्योग) ७४.१६ सहत्वा भक्षयित्वा (शांति) ११२.१५ सहदेववचः श्रुत्वा (सभा) ७७.६९ स सनापति वाप (अनु). ८६.३१ सस्नुस्तस्यांपपुश्चास्या (कर्ण) ४६.८६ सहतः पतितः येते (विरा) २५.२१ स हत्वा राक्षसानीक (द्रोण) १५६.१५१ सहदेव बने दृष्ट्वा (वन) २७.३३ स सेन्निवृत्तः सहसा (द्रोण) २७.१५ स स्म कौसल्यमागम्य (शांति) ८२.१२ सपतः प्राततद्भूमी (शल्य) २६.१७ स हत्वा राक्षसी सेना(द्रोण) १७५.८६ सहदेवश्च मे पुत्रः सदा (सभा) ७६.८ For Private Personel Use Only www.lainelibrary.org

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